विस्तृत उत्तर
यजुर्वेद (30.3) के इस मंत्र का अर्थ इस प्रकार है:
ॐ विश्वानि देव सवितर्दुरितानि परा सुव। यद् भद्रं तन्न आ सुव॥
हे सकल जगत के उत्पत्तिकर्ता, समग्र ऐश्वर्य युक्त, शुद्धस्वरूप परमेश्वर! आप कृपा करके हमारे सम्पूर्ण दुर्गुणों, दुर्व्यसनों और दुःखों को दूर कर दीजिए। जो कल्याणकारक गुण, कर्म, स्वभाव और पदार्थ हैं, वे सब हमको प्राप्त कराइए।





