नील सरस्वती मंत्र
(ज्ञान एवं वाणी सिद्धि हेतु)
मंत्र
मंत्र १:
ॐ ह्रीं श्रीं ऐं वाग्वादिनि भगवति अर्हन्मुख निवासिनि सरस्वति आस्ये प्रकाशं कुरु कुरु स्वाहा ऐं नमःमंत्र २:
एम अवाने स्वाहा(वैकल्पिक रूप से 'ऐं ह्रीं श्रीं नील सरस्वत्यै स्वाहा' भी मिलता है)
देवता
देवता: नील सरस्वती (देवी सरस्वती का एक उग्र एवं विशिष्ट रूप)।
स्रोत
स्रोत: निखिलमंत्रविज्ञान पत्रिका तथा विभिन्न यूट्यूब स्रोतों में उल्लेखित।
प्रयोजन
प्रयोजन: ज्ञान का प्रकाश, तीव्र बुद्धि, एकाग्रता में वृद्धि, ज्योतिषीय भविष्यवाणियों की सत्यता में वृद्धि, वाक् सिद्धि, तथा शत्रु एवं कलह की शांति।
विधि
विधि:
- इस साधना के लिए श्वेत वस्त्र धारण कर पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठने का विधान है।
- सामने गुरु चित्र, सरस्वती चित्र, एवं 'नील मेधा यन्त्र' या 'सरस्वती यंत्र' को पीले पुष्प के आसन पर स्थापित करें।
- शुद्ध घी का दीपक एवं अगरबत्ती प्रज्वलित करें।
- सर्वप्रथम गुरु पूजन एवं गुरु मंत्र का जप, तत्पश्चात् गणेश पूजन करें।
- फिर सरस्वती का ध्यान कर मूल मंत्र (उपरोक्त में से कोई एक) का मणिमाला अथवा पीले हकीक की माला से कम से कम एक माला (या पांच माला) जप करें।
- कुछ विधानों में 'ॐ ऐं ॐ' मंत्र का २४ मिनट तक जप करने का भी निर्देश है।
- एकांत स्थान, रात्रि १२ से ३ बजे का समय, तथा नीले हकीक पत्थर पर यंत्र स्थापना भी कुछ साधनाओं में वर्णित है।
महत्व
महत्व: नील सरस्वती, देवी सरस्वती का एक अपेक्षाकृत अल्पज्ञात किन्तु अत्यंत शक्तिशाली तांत्रिक स्वरूप हैं। सामान्य सरस्वती मंत्र जहाँ सौम्य विद्या और कलाओं के लिए हैं, वहीं नील सरस्वती के मंत्र तीव्र ज्ञान, वाक्पटुता, गूढ़ विद्याओं की सिद्धि और नकारात्मक शक्तियों के शमन के लिए विशेष प्रभावी माने जाते हैं। इनकी साधना जटिल हो सकती है और गुरु मार्गदर्शन की अपेक्षा रखती है, जो इनके अल्पप्रचलन का एक कारण हो सकता है।






