विस्तृत उत्तर
नील सरस्वती देवी, जिन्हें नीलासरस्वती या नीला तारा भी कहा जाता है, दरअसल महाविद्या तारा का ही ज्ञान और वाणी से जुड़ा रूप हैं। इनका प्रकट होना इसलिए हुआ ताकि दुनिया को ज्ञान और बोलने की शक्ति (वाणी) दी जा सके।
कुछ लोग नील सरस्वती को उग्रतारा का ही एक रूप मानते हैं — जब तारा देवी अपना पूरा उग्र और ज्ञानमय रूप धारण करती हैं, तो वे नील सरस्वती कहलाती हैं।
नील सरस्वती को हम तारा महाविद्या के जन्म से ही जुड़ा मान सकते हैं — जब आदि शक्ति तारा के रूप में प्रकट हुईं, उसी समय उनके भीतर से नील सरस्वती रूप निकला, जो पूरी सृष्टि को ज्ञान देने आई थीं।
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