विस्तृत उत्तर
माँ भुवनेश्वरी का स्वरूप अत्यंत सौम्य और प्रकाशमान है:
— उनके तीन नेत्र हैं।
— उनकी शारीरिक कांति उदयकालीन सूर्य के समान देदीप्यमान होती है।
— वे अपने चार हाथों में से दो में पाश और अंकुश धारण करती हैं।
— अन्य दो हाथ वरद (वरदान देने की) और अभय (भय दूर करने की) मुद्रा में होते हैं।
— ध्यान श्लोक में उनका वर्णन: उदयकालीन सूर्य जैसी कांति वाली, मस्तक पर चंद्रकला का किरीट धारण करने वाली, उन्नत पयोधरों वाली, मंद मुस्कान युक्त मुख वाली।
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