माँ भुवनेश्वरी का स्वरूप कैसा है?
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माँ भुवनेश्वरी स्वरूप: सौम्य और प्रकाशमान। तीन नेत्र। कांति = उदयकालीन सूर्य जैसी। हाथों में पाश और अंकुश। वरद और अभय मुद्रा। मस्तक पर चंद्रकला का किरीट। मंद मुस्कान।
- 1उनके तीन नेत्र हैं।
- 2उनकी शारीरिक कांति उदयकालीन सूर्य के समान देदीप्यमान होती है।
- 3वे अपने चार हाथों में से दो में पाश और अंकुश धारण करती हैं।
- 4अन्य दो हाथ वरद (वरदान देने की) और अभय (भय दूर करने की) मुद्रा में होते हैं।
- 5ध्यान श्लोक में उनका वर्णन: उदयकालीन सूर्य जैसी कांति वाली, मस्तक पर चंद्रकला का किरीट धारण करने वाली, उन्नत पयोधरों वाली, मंद मुस्कान युक्त मुख वाली।
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