विस्तृत उत्तर
माँ त्रिपुर सुंदरी, जिन्हें षोडशी (सोलह वर्षीय कन्या), ललिता (मनोहर लीला करने वाली), राजराजेश्वरी (समस्त ब्रह्मांड की साम्राज्ञी) और श्री विद्या के नाम से भी जाना जाता है, दस महाविद्याओं में सर्वाधिक सौम्य और सौंदर्यमयी देवी मानी जाती हैं।
वे श्री कुल की अधिष्ठात्री देवी हैं और श्री विद्या साधना परंपरा की केंद्र बिंदु हैं। वे सोलह कलाओं से परिपूर्ण हैं और भक्तों को मुक्ति प्रदान करने वाली देवी के रूप में पूजित हैं। वे स्वयं आदिशक्ति पार्वती का स्वरूप हैं।
श्री विद्या साधना अत्यंत व्यवस्थित और क्रमबद्ध है, जिसमें यंत्र (श्री चक्र), मंत्र (पञ्चदशी, षोडशी) और तंत्र (पूजा विधि, न्यास, मुद्रा) का एक जटिल और गहन समन्वय देखने को मिलता है।
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