विस्तृत उत्तर
माँ त्रिपुर भैरवी दस महाविद्याओं में पाँचवीं अथवा छठी महाविद्या के रूप में प्रतिष्ठित हैं। वे विनाश और विध्वंस से संबंधित भगवान शिव के उग्र स्वरूप भैरव की शक्ति हैं।
उन्हें 'बंदीछोड़ माता' भी कहा जाता है, क्योंकि वे अपने भक्तों को सभी प्रकार के बंधनों (शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और कर्मिक) से मुक्त करती हैं।
वे ऊर्ध्वान्वय (ऊपर की ओर जाने वाली परंपरा) की देवता हैं, जिनके चार भुजाएँ और तीन नेत्र हैं। माँ त्रिपुर भैरवी तमोगुण और रजोगुण की अधिष्ठात्री देवी हैं।
त्रिपुर भैरवी साधना तीव्र ऊर्जा (तपस) और विनाश (अहंकार और नकारात्मकता का) के माध्यम से साधक के रूपांतरण पर केंद्रित है।
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