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विस्तृत उत्तर
माँ धूमावती को प्रायः स्वामी रहित (विधवा) माना जाता है, जो उनके एकाकी और अनासक्त स्वरूप को दर्शाता है।
कुछ कथाओं में उन्हें अपने पति शिव (धूमावन के रूप में) को ही अपनी क्षुधा शांत करने के लिए भक्षण कर लेने वाली देवी के रूप में भी वर्णित किया गया है, जो अज्ञान की शक्ति (भूख, लालसा) द्वारा चेतना (शिव) को ढक लेने का प्रतीक है।
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