विस्तृत उत्तर
माँ भुवनेश्वरी दस महाविद्याओं में चतुर्थ स्थान पर प्रतिष्ठित हैं। उनके नाम का अर्थ है 'भुवन' (संपूर्ण ब्रह्मांड या लोक) की 'ईश्वरी' (शासिका या स्वामिनी)।
वे ज्ञान शक्ति की देवी मानी जाती हैं और सृष्टि की रचना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वे समस्त ब्रह्मांड को अपने भीतर धारण करने वाली और उसका पोषण करने वाली माँ के रूप में पूजी जाती हैं।
भुवनेश्वरी साधना का केंद्र 'आकाश' या 'स्थान' की अवधारणा है, जो साधक को भौतिक और मानसिक सीमाओं से परे ले जाकर असीम विस्तार और सार्वभौमिक चेतना का अनुभव कराती है।
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