विस्तृत उत्तर
माँ मातंगी का एक प्रसिद्ध नाम 'उच्छिष्ट चांडालिनी' या 'महा-पिशाचिनी' भी है, जो उनके सामाजिक बंधनों से परे, अपवित्रता और परिधि से जुड़े स्वरूप को दर्शाता है।
उच्छिष्ट' को स्वीकार करने और उसे साधना का अंग बनाने से साधक शुद्धता-अशुद्धता के द्वंद्व से ऊपर उठता है, जिससे उसे सामाजिक और मानसिक बंधनों से मुक्ति मिलती है और वह गहन तांत्रिक ज्ञान प्राप्त करने में सक्षम होता है।





