विस्तृत उत्तर
पुराणों में लक्ष्मी की उत्पत्ति समुद्र-मंथन की प्रसिद्ध कथा से जुड़ी है। श्रीमद्भागवत, विष्णु पुराण और अन्य ग्रंथों के अनुसार देवताओं और असुरों द्वारा क्षीरसागर मंथन करने पर चौदह रत्न निकले, उनमें एक अनुपम सुन्दरी देवी प्रकट हुईं जो कमल के पुष्प पर विराजमान थीं — यही महालक्ष्मी थीं। इस तरह लक्ष्मी (कमला) समुद्र से उत्पन्न हुईं और भगवान विष्णु ने उन्हें अपनी पत्नी रूप में स्वीकार किया।
तांत्रिक संदर्भ में कमला महाविद्या की उत्पत्ति सती की दस महाविद्या रूपों में से एक के रूप में मानी जाती है। देवी भागवत में देवी कहती हैं कि 'मैं ही लक्ष्मी रूप में समस्त लोकों का पालन-पोषण करती हूँ।'
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