विस्तृत उत्तर
माँ तारा के भैरव अक्षोभ्य ऋषि हैं, जो भगवान शिव का ही एक शांत और स्थिर स्वरूप माने जाते हैं और उनके मस्तक पर स्थित दिखाए जाते हैं।
अक्षोभ्य का अर्थ है 'जिसे क्षुब्ध न किया जा सके'।
माँ तारा ज्ञान और शक्ति की प्रचंड देवी हैं, और उनके शिव का 'अक्षोभ्य' होना यह इंगित करता है कि ऐसी असीम शक्ति और ज्ञान को धारण करने, संतुलित करने और नियंत्रित करने के लिए परम शांति और स्थिरता की पृष्ठभूमि नितांत आवश्यक है।
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