विस्तृत उत्तर
उन्हें 'बंदीछोड़ माता' भी कहा जाता है, क्योंकि वे अपने भक्तों को सभी प्रकार के बंधनों (शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और कर्मिक) से मुक्त करती हैं।
त्रिपुर भैरवी का 'बंदीछोड़ माता' स्वरूप यह दर्शाता है कि तांत्रिक साधना का अंतिम लक्ष्य सभी प्रकार के बंधनों — शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और कर्मिक — से मुक्ति है, जिससे साधक आत्म-साक्षात्कार और मोक्ष प्राप्त कर सके।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





