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विस्तृत उत्तर
माँ त्रिपुर भैरवी कुंडलिनी शक्ति का भी प्रतिनिधित्व करती हैं, जो मूलाधार चक्र में सुप्त रहती है और जागृत होने पर ऊर्ध्वमुखी होकर सहस्रार में शिव से मिलती है।
त्रिपुर भैरवी साधना तीव्र ऊर्जा (तपस) और विनाश (अहंकार और नकारात्मकता का) के माध्यम से साधक के रूपांतरण पर केंद्रित है।
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