कुंडलिनीतंत्र में सहस्रार चक्र तक पहुंचने पर क्या स्थिति होती है?शिव-शक्ति मिलन = समाधि। निर्विकल्प (द्वैत समाप्त)। अमृत प्रवाह, सहस्र सूर्य प्रकाश, सर्वज्ञता, मोक्ष। अत्यंत दुर्लभ। रामकृष्ण/रमण = उदाहरण।#सहस्रार#चक्र#स्थिति
ध्यान अनुभवध्यान करते समय सहस्रार चक्र पर दबाव का अनुभव क्यों होता है?कुंडलिनी ऊर्ध्वगमन (सहस्रार पहुंचने), 1000 दल 'खुलना', ब्रह्मरंध्र (ऊर्जा मिलन), रक्त प्रवाह↑। शुभ — किन्तु सिरदर्द = गुरु। Grounding, कम समय, प्राणायाम।
लोकमूलाधार से सहस्रार तक नाद कैसे उठता है?नाद श्वास से मूलाधार से सहस्रार उठता है।#मूलाधार#सहस्रार#नाद
परिचय और स्वरूपमाँ त्रिपुर भैरवी और कुंडलिनी शक्ति का क्या संबंध है?माँ त्रिपुर भैरवी = कुंडलिनी शक्ति का प्रतिनिधित्व। कुंडलिनी = मूलाधार चक्र में सुप्त → जागृत होने पर ऊर्ध्वमुखी → सहस्रार में शिव से मिलती है। साधना = तीव्र तपस और अहंकार-नकारात्मकता के विनाश से रूपांतरण।#कुंडलिनी शक्ति#मूलाधार चक्र#सहस्रार
शव साधना की विधिशव साधना का यौगिक उद्देश्य क्या है?शव साधना का यौगिक उद्देश्य कुंडलिनी शक्ति को जाग्रत कर सहस्रार में स्थित परमशिव से उसका विलय कराना है — यही आत्म-साक्षात्कार और मोक्ष की अवस्था है।#यौगिक उद्देश्य#कुंडलिनी जागरण#सहस्रार
ध्यान अनुभवध्यान में सफेद प्रकाश दिखने का क्या मतलब है? 'रंगीन → सफेद = प्रगति।' सहस्रार (शुद्ध चेतना), शिव प्रकाश, ध्यान गहन। 'असहनीय प्रकाश = अत्यंत गहन।' साक्षी बनें — शून्य/समाधि ओर।#ध्यान#सफेद#प्रकाश
शिव ध्यानशिव ध्यान करते समय किस चक्र पर ध्यान केंद्रित करें?आज्ञा चक्र (भ्रूमध्य) सर्वप्रचलित — शिव का तीसरा नेत्र। सहस्रार (मस्तक शीर्ष) उन्नत साधना। अनाहत (हृदय) भक्ति ध्यान। सर्वसुलभ: भ्रूमध्य + ज्योति कल्पना + 'ॐ' जप। अत्यधिक जोर से न लगाएं।#चक्र#आज्ञा#सहस्रार