विस्तृत उत्तर
सहस्रार (मस्तक शीर्ष — 1000 पंखुड़ी कमल) = अंतिम चक्र:
स्थिति
- 1शिव-शक्ति मिलन: कुंडलिनी (शक्ति) मूलाधार से सहस्रार (शिव) तक → मिलन = समाधि।
- 2निर्विकल्प समाधि: 'मैं' नहीं — केवल ब्रह्म/चैतन्य। द्वैत समाप्त।
- 3अमृत अनुभव: मस्तक से शीतल अमृत प्रवाह (अनुभव)।
- 4अनंत प्रकाश: सहस्र सूर्य समान प्रकाश — आंतरिक।
- 5सर्वज्ञता: सम्पूर्ण ज्ञान — भूत/वर्तमान/भविष्य।
- 6मोक्ष: जन्म-मृत्यु चक्र से मुक्ति — जीवनमुक्त।
दुर्लभ: अत्यंत दुर्लभ अनुभव — जीवन में कुछ क्षण या स्थायी (सिद्ध)। रामकृष्ण, रमण महर्षि = उदाहरण।





