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कुंडलिनी📜 योग शास्त्र, तंत्र शास्त्र, शैव दर्शन1 मिनट पठन

तंत्र में सहस्रार चक्र तक पहुंचने पर क्या स्थिति होती है?

संक्षिप्त उत्तर

शिव-शक्ति मिलन = समाधि। निर्विकल्प (द्वैत समाप्त)। अमृत प्रवाह, सहस्र सूर्य प्रकाश, सर्वज्ञता, मोक्ष। अत्यंत दुर्लभ। रामकृष्ण/रमण = उदाहरण।

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विस्तृत उत्तर

सहस्रार (मस्तक शीर्ष — 1000 पंखुड़ी कमल) = अंतिम चक्र:

स्थिति

  1. 1शिव-शक्ति मिलन: कुंडलिनी (शक्ति) मूलाधार से सहस्रार (शिव) तक → मिलन = समाधि
  2. 2निर्विकल्प समाधि: 'मैं' नहीं — केवल ब्रह्म/चैतन्य। द्वैत समाप्त।
  3. 3अमृत अनुभव: मस्तक से शीतल अमृत प्रवाह (अनुभव)।
  4. 4अनंत प्रकाश: सहस्र सूर्य समान प्रकाश — आंतरिक।
  5. 5सर्वज्ञता: सम्पूर्ण ज्ञान — भूत/वर्तमान/भविष्य।
  6. 6मोक्ष: जन्म-मृत्यु चक्र से मुक्ति — जीवनमुक्त।

दुर्लभ: अत्यंत दुर्लभ अनुभव — जीवन में कुछ क्षण या स्थायी (सिद्ध)। रामकृष्ण, रमण महर्षि = उदाहरण।

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शास्त्रीय स्रोत
योग शास्त्र, तंत्र शास्त्र, शैव दर्शन
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