विस्तृत उत्तर
विशुद्ध = पांचवां चक्र — कंठ:
स्थान: कंठ। दल: 16। रंग: नीला। तत्व: आकाश। बीज: 'हं'। देवता: शंकर। स्थान: सरस्वती।
क्या होता है
- ▸'संसार त्याग भाव प्रबल — सन्यास भाव।'
- ▸'संसार मिथ्या, भ्रम-जाल, स्वप्नवत् लगने लगता है।'
- ▸'शंकर जी की शक्ति आ जाती है।'
- ▸'16 कलाएं, 16 विभूतियां विद्यमान।'
साधना: 'ॐ ऐं ह्रीं श्रीं विशुद्धय फट'। गायन/मंत्र उच्चारण। सर्वांगासन (गला)।
लोग यह भी पूछते हैं
क्या होता है
- 'संसार त्याग भाव प्रबल — सन्यास भाव। ' - 'संसार मिथ्या, भ्रम-जाल, स्वप्नवत् लगने लगता है। ' - 'शंकर जी की शक्ति आ जाती है। ' - '16 कलाएं, 16 विभूतियां विद्यमान। '
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक




