विस्तृत उत्तर
मूलाधार = प्रथम चक्र (गुदा+लिंग मध्य) — कुंडलिनी निवास:
बीज: 'लं'। तत्व: पृथ्वी। रंग: लाल। पंखुड़ी: 4।
सक्रियता विधि
- 1बीज जप: 'ॐ लं' — 108 बार। मूलाधार पर ध्यान केंद्रित।
- 2मूलबंध: गुदा + लिंग की मांसपेशियां सिकोड़ें (contract) → 5 सेकंड → छोड़ें। 10-20 बार।
- 3आसन: सिद्धासन/पद्मासन — एड़ी = मूलाधार पर दबाव।
- 4ध्यान: लाल त्रिकोण + 4 पंखुड़ी कमल + कुंडलिनी सर्प — कल्पना।
- 5प्राणायाम: कपालभाति → ऊर्जा मूलाधार।
लक्षण: स्थिरता, सुरक्षा भाव, शारीरिक ऊर्जा, भय कम।
सावधानी: धीरे-धीरे, जबरदस्ती नहीं। गुरु मार्गदर्शन उत्तम।





