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कुंडलिनी📜 हठ योग प्रदीपिका, तंत्र शास्त्र1 मिनट पठन

तंत्र में मूलाधार चक्र को कैसे सक्रिय करें?

संक्षिप्त उत्तर

बीज 'ॐ लं' 108, मूलबंध (contract+release), सिद्धासन (एड़ी दबाव), लाल त्रिकोण ध्यान, कपालभाति। लक्षण: स्थिरता, अभय, ऊर्जा। धीरे-धीरे। गुरु उत्तम।

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विस्तृत उत्तर

मूलाधार = प्रथम चक्र (गुदा+लिंग मध्य) — कुंडलिनी निवास:

बीज: 'लं'। तत्व: पृथ्वी। रंग: लाल। पंखुड़ी: 4।

सक्रियता विधि

  1. 1बीज जप: 'ॐ लं' — 108 बार। मूलाधार पर ध्यान केंद्रित।
  2. 2मूलबंध: गुदा + लिंग की मांसपेशियां सिकोड़ें (contract) → 5 सेकंड → छोड़ें। 10-20 बार।
  3. 3आसन: सिद्धासन/पद्मासन — एड़ी = मूलाधार पर दबाव।
  4. 4ध्यान: लाल त्रिकोण + 4 पंखुड़ी कमल + कुंडलिनी सर्प — कल्पना।
  5. 5प्राणायाम: कपालभाति → ऊर्जा मूलाधार।

लक्षण: स्थिरता, सुरक्षा भाव, शारीरिक ऊर्जा, भय कम।

सावधानी: धीरे-धीरे, जबरदस्ती नहीं। गुरु मार्गदर्शन उत्तम।

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शास्त्रीय स्रोत
हठ योग प्रदीपिका, तंत्र शास्त्र
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