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विस्तृत उत्तर
स्वाधिष्ठान = दूसरा चक्र:
स्थान: लिंग मूल। दल: 6। रंग: सिंदूरी/नारंगी। तत्व: जल। बीज: 'वं'। देवता: इन्द्र।
साधना
- 1बीज जप: 'ॐ वं' 108 बार — स्वाधिष्ठान पर ध्यान।
- 2जागरण मंत्र: 'ॐ वं वं स्वाधिष्ठान जाग्रय जाग्रय वं वं ॐ फट'।
- 3ध्यान: नारंगी 6 दल कमल + जल + अर्धचंद्र कल्पना।
- 4प्राणायाम: कपालभाति + नाड़ी शोधन।
- 5आसन: बद्धकोणासन, तितली आसन।
जागरण लक्षण: इन्द्रिय नियंत्रण, विचार नियंत्रण, रचनात्मकता।
सावधानी: 'अहंकार रूप में अभिमानी होने लगता है — खतरनाक।' गुरु आवश्यक।
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