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कुंडलिनी📜 शोध: DhyanSamadhi, BhaktiSatsang, Patrika — स्वाधिष्ठान विवरण1 मिनट पठन

तंत्र में स्वाधिष्ठान चक्र की साधना कैसे करें?

संक्षिप्त उत्तर

दूसरा चक्र — 6 दल, नारंगी, जल, बीज 'वं'। 'ॐ वं वं स्वाधिष्ठान जाग्रय...' (HinduPad)। लक्षण: इन्द्रिय नियंत्रण, रचनात्मकता। सावधानी: अहंकार (DhyanSamadhi)। गुरु।

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विस्तृत उत्तर

स्वाधिष्ठान = दूसरा चक्र (DhyanSamadhi/BhaktiSatsang verified):

स्थान: लिंग मूल। दल: 6। रंग: सिंदूरी/नारंगी। तत्व: जल। बीज: 'वं'। देवता: इन्द्र (DhyanSamadhi)।

साधना

  1. 1बीज जप: 'ॐ वं' 108 बार — स्वाधिष्ठान पर ध्यान।
  2. 2जागरण मंत्र: 'ॐ वं वं स्वाधिष्ठान जाग्रय जाग्रय वं वं ॐ फट' (HinduPad)।
  3. 3ध्यान: नारंगी 6 दल कमल + जल + अर्धचंद्र कल्पना।
  4. 4प्राणायाम: कपालभाति + नाड़ी शोधन।
  5. 5आसन: बद्धकोणासन, तितली आसन।

जागरण लक्षण (DhyanSamadhi): इन्द्रिय नियंत्रण, विचार नियंत्रण (Patrika), रचनात्मकता (Shikshanam: 'रचनात्मकता और भावनाओं का केंद्र')।

सावधानी (DhyanSamadhi): 'अहंकार रूप में अभिमानी होने लगता है — खतरनाक।' गुरु आवश्यक।

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शास्त्रीय स्रोत
शोध: DhyanSamadhi, BhaktiSatsang, Patrika — स्वाधिष्ठान विवरण
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