विस्तृत उत्तर
कुंडलिनी ऊर्ध्वगमन लक्षण (DhyanSamadhi — शास्त्रीय):
चक्र अनुसार ज्योति (DhyanSamadhi verified)
- ▸मूलाधार = अग्नि रूप ज्योति।
- ▸स्वाधिष्ठान = प्रवाल अंकुर (मूंगा) सी।
- ▸मणिपुर = विद्युत (बिजली) जैसी चमक।
- ▸अनाहत = लिंग आकृति ज्योति।
- ▸विशुद्ध = श्वेत वर्ण।
- ▸आज्ञा = धूम्र शिखा (धुएं की लौ)।
- ▸सहस्रार = चमकता परशु (कुल्हाड़ी)।
सामान्य लक्षण
- ▸रीढ़ में विद्युत/गर्मी/ठंडक प्रवाह।
- ▸शारीरिक कंपन, अनैच्छिक गति।
- ▸भावनात्मक: रोना/हंसना/आनंद।
- ▸ध्वनि: नाद (ॐ, घंटी, बांसुरी)।
- ▸प्रकाश (बंद आंखों में)।
BhaktiSatsang: 'मूलाधार भेदन = निम्न स्वरूप से ऊपर। अनाहत = वासना मुक्त। आज्ञा = आत्मज्ञान + परमानंद।'





