ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

ऊपर — प्रश्नोत्तरी

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 2 प्रश्न

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कुंडलिनी

तंत्र में कुंडलिनी ऊर्जा ऊपर उठते समय क्या लक्षण दिखते हैं?

ज्योति per चक्र (DhyanSamadhi): मूलाधार=अग्नि, स्वाधिष्ठान=प्रवाल, मणिपुर=विद्युत, अनाहत=लिंग, विशुद्ध=श्वेत, आज्ञा=धूम्र, सहस्रार=परशु। सामान्य: रीढ़ विद्युत, कंपन, रोना/हंसना, नाद, प्रकाश।

कुंडलिनीलक्षणऊपर
कुंडलिनी

ध्यान में कुंडलिनी शक्ति सर्प की तरह ऊपर चढ़ने का अनुभव कैसा होता है?

लहरदार/सर्पिल (रीढ़), 'बिजली कौंधना' (अमर उजाला)। Per चक्र ज्योति (BhaktiSatsang: अग्नि→प्रवाल→विद्युत→श्वेत→धूम्र→परशु)। सहस्रार=प्रकाश+परमानंद। बिना गुरु=खतरनाक!

कुंडलिनीसर्पऊपर

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।