विस्तृत उत्तर
महर्लोक के ऊपर तीन और ऊर्ध्व लोक स्थित हैं। ये तीन लोक क्रमशः जनलोक, तपोलोक और सत्यलोक (ब्रह्मलोक) हैं। महर्लोक से जनलोक की दूरी दो करोड़ योजन है। जनलोक से तपोलोक की दूरी आठ करोड़ योजन है। तपोलोक से सत्यलोक की दूरी बारह करोड़ योजन है। इन तीनों लोकों को अकृतक लोक कहा जाता है अर्थात ये पूर्णतः अविनाशी और नित्य हैं। ब्रह्मा के दिन की समाप्ति पर होने वाले नैमित्तिक प्रलय के समय भी ये लोक पूरी तरह नष्ट नहीं होते। इन लोकों में ब्रह्मा जी के मानस पुत्र सनकादि और वैराज तपस्वी निवास करते हैं।
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