विस्तृत उत्तर
सत्यलोक भौतिक सृष्टि की अन्तिम सीमा है। विष्णु पुराण और श्रीमद्भागवत के अनुसार सत्यलोक के ऊपर दो करोड़ बासठ लाख योजन की दूरी से वैकुण्ठ लोक (सनातन आध्यात्मिक जगत) का आरम्भ हो जाता है। इस प्रकार सत्यलोक से ठीक ऊपर शाश्वत वैकुण्ठ ग्रहों से युक्त चिदाकाश (सनातन आध्यात्मिक जगत) का आरम्भ होता है। यह वैकुण्ठ प्रलय की अग्नि से सर्वथा मुक्त है और शाश्वत है। सत्यलोक इसी चिदाकाश और भौतिक ब्रह्माण्ड के बीच की अन्तिम सीमारेखा पर स्थित है। महाप्रलय के समय सत्यलोक के निवासी ब्रह्मा जी के साथ इसी शाश्वत वैकुण्ठ या गोलोक में प्रवेश करते हैं।
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