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कुंडलिनी📜 हठ योग प्रदीपिका, तंत्र शास्त्र, शैव तंत्र1 मिनट पठन

तंत्र में कुंडलिनी जागरण की विधि क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

मंत्र योग, हठ योग (आसन+प्राणायाम+बंध), राज योग (ध्यान), शक्तिपात (गुरु), तांत्रिक। मूलाधार→6 चक्र→सहस्रार = मोक्ष। गुरु अनिवार्य — बिना = खतरनाक।

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विस्तृत उत्तर

कुंडलिनी = मूलाधार चक्र में सुप्त शक्ति — जागरण = मोक्ष मार्ग:

विधियां

  1. 1मंत्र योग: बीज मंत्र जप → ध्वनि कंपन → कुंडलिनी जागृत।
  2. 2हठ योग: आसन + प्राणायाम + बंध (मूलबंध, उड्डियान, जालंधर) + मुद्रा।
  3. 3राज योग: ध्यान + एकाग्रता → चक्र ध्यान → जागरण।
  4. 4शक्तिपात: गुरु → शिष्य = तत्काल ऊर्जा transfer → जागरण।
  5. 5तांत्रिक: विशेष क्रियाएं — गोपनीय, गुरु दीक्षा।

मार्ग: मूलाधार → स्वाधिष्ठान → मणिपुर → अनाहत → विशुद्धि → आज्ञा → सहस्रार = शिव-शक्ति मिलन = मोक्ष।

सावधानी: बिना गुरु = अत्यंत खतरनाक। गलत जागरण = मानसिक विकार, शारीरिक कष्ट। गुरु अनिवार्य।

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शास्त्रीय स्रोत
हठ योग प्रदीपिका, तंत्र शास्त्र, शैव तंत्र
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