विस्तृत उत्तर
कुंडलिनी = मूलाधार चक्र में सुप्त शक्ति — जागरण = मोक्ष मार्ग:
विधियां
- 1मंत्र योग: बीज मंत्र जप → ध्वनि कंपन → कुंडलिनी जागृत।
- 2हठ योग: आसन + प्राणायाम + बंध (मूलबंध, उड्डियान, जालंधर) + मुद्रा।
- 3राज योग: ध्यान + एकाग्रता → चक्र ध्यान → जागरण।
- 4शक्तिपात: गुरु → शिष्य = तत्काल ऊर्जा transfer → जागरण।
- 5तांत्रिक: विशेष क्रियाएं — गोपनीय, गुरु दीक्षा।
मार्ग: मूलाधार → स्वाधिष्ठान → मणिपुर → अनाहत → विशुद्धि → आज्ञा → सहस्रार = शिव-शक्ति मिलन = मोक्ष।





