विस्तृत उत्तर
मंत्र जप से आध्यात्मिक जागरण का वर्णन तंत्र शास्त्र और भागवत पुराण में मिलता है:
आध्यात्मिक जागरण = चेतना का विस्तार
सामान्य अवस्था में चेतना देह-मन तक सीमित। जागरण = चेतना का देह-मन की सीमाओं से परे विस्तार।
जप से जागरण के चरण
1मन की शुद्धि
नित्य जप → मन से राग-द्वेष-काम-क्रोध धीरे-धीरे कम → शुद्ध चित्त।
2नाड़ी शुद्धि
तंत्र शास्त्र: जप से सूक्ष्म नाड़ियाँ शुद्ध होती हैं। शुद्ध नाड़ियों में प्राण शक्ति बाधारहित प्रवाहित होती है।
3चक्र जागृति
विशेष मंत्र विशेष चक्र जागृत करते हैं। 'ॐ' — सहस्रार। 'ऐं' — आज्ञा।
4कुंडलिनी
तंत्र शास्त्र में — पर्याप्त साधना से मूलाधार में सुषुप्त कुंडलिनी शक्ति जागृत होती है और ऊर्ध्वगमन करती है।
5भागवत पुराण
यस्य स्मरणमात्रेण ज्ञानमुत्पद्यते स्वयम्।' — जिसके स्मरण मात्र से ज्ञान स्वतः उत्पन्न होता है।
जागरण के संकेत
- ▸जप में स्वतः एकाग्रता
- ▸आनंद का अनुभव
- ▸दृष्टिकोण में परिवर्तन
- ▸निर्भयता
- ▸करुणा का भाव





