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कुंडलिनी📜 शोध: AWGP.org, DhyanSamadhi, HinduPad, BhaktiSatsang — षट्चक्र भेदन1 मिनट पठन

तंत्र में चक्र भेदन कैसे किया जाता है?

संक्षिप्त उत्तर

षट्चक्र भेदन (AWGP)। प्राणायाम→बंध→बीज जप (लं/वं/रं/यं/हं/ॐ)। जागरण मंत्र (HinduPad: 'ॐ लं परम तत्वाय...')। क्रमशः (मूलाधार→ऊपर)। अनाहत=वासना मुक्त, आज्ञा=आत्मज्ञान। गुरु अनिवार्य।

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विस्तृत उत्तर

चक्र भेदन = कुंडलिनी द्वारा 6 चक्रों को 'भेदना' (AWGP: 'षट्चक्र बेधन की साधना'):

विधि

  1. 1प्राणायाम: नाड़ी शोधन → इड़ा-पिंगला संतुलन → सुषुम्ना खुले।
  2. 2बंध: मूलबंध + उड्डियानबंध + जालंधरबंध → कुंडलिनी ऊर्ध्वगमन।
  3. 3बीज मंत्र जप (शोध — HinduPad/BhaktiSatsang):
  • मूलाधार: 'लं' → स्वाधिष्ठान: 'वं' → मणिपुर: 'रं' → अनाहत: 'यं' → विशुद्ध: 'हं' → आज्ञा: 'ॐ'
  1. 1जागरण मंत्र (HinduPad verified):
  • 'ॐ लं परम तत्वाय गं ॐ फट' (मूलाधार)
  • 'ॐ वं वं स्वाधिष्ठान जाग्रय जाग्रय वं वं ॐ फट'
  • ... प्रत्येक चक्र का विशिष्ट जागरण मंत्र।
  1. 1क्रमशः: मूलाधार पहले → फिर ऊपर। एक साथ सभी नहीं।

AWGP: 'अनाहत भेदन = वासना मुक्त। आज्ञा भेदन = आत्मज्ञान।'

सावधानी: गुरु अनिवार्य। बिना गुरु = खतरनाक (मानसिक/शारीरिक)।

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शास्त्रीय स्रोत
शोध: AWGP.org, DhyanSamadhi, HinduPad, BhaktiSatsang — षट्चक्र भेदन
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