विस्तृत उत्तर
चक्र भेदन = कुंडलिनी द्वारा 6 चक्रों को 'भेदना' (AWGP: 'षट्चक्र बेधन की साधना'):
विधि
- 1प्राणायाम: नाड़ी शोधन → इड़ा-पिंगला संतुलन → सुषुम्ना खुले।
- 2बंध: मूलबंध + उड्डियानबंध + जालंधरबंध → कुंडलिनी ऊर्ध्वगमन।
- 3बीज मंत्र जप (शोध — HinduPad/BhaktiSatsang):
- ▸मूलाधार: 'लं' → स्वाधिष्ठान: 'वं' → मणिपुर: 'रं' → अनाहत: 'यं' → विशुद्ध: 'हं' → आज्ञा: 'ॐ'
- 1जागरण मंत्र (HinduPad verified):
- ▸'ॐ लं परम तत्वाय गं ॐ फट' (मूलाधार)
- ▸'ॐ वं वं स्वाधिष्ठान जाग्रय जाग्रय वं वं ॐ फट'
- ▸... प्रत्येक चक्र का विशिष्ट जागरण मंत्र।
- 1क्रमशः: मूलाधार पहले → फिर ऊपर। एक साथ सभी नहीं।
AWGP: 'अनाहत भेदन = वासना मुक्त। आज्ञा भेदन = आत्मज्ञान।'
सावधानी: गुरु अनिवार्य। बिना गुरु = खतरनाक (मानसिक/शारीरिक)।





