विस्तृत उत्तर
कुंडलिनी जागरण — शारीरिक बदलाव:
तत्काल
- 1ऊर्जा प्रवाह: रीढ़ = विद्युत/गर्मी/ठंडक — 'बिजली कौंधना' (अमर उजाला)।
- 2ज्योति (BhaktiSatsang verified): मूलाधार=अग्नि, स्वाधिष्ठान=प्रवाल, मणिपुर=विद्युत, अनाहत=लिंग, विशुद्ध=श्वेत, आज्ञा=धूम्र, सहस्रार=परशु।
- 3कंपन/अनैच्छिक गति: क्रिया (योग)।
- 4ताप परिवर्तन: गर्मी/ठंडक alternating।
दीर्घकालिक
- 1स्वास्थ्य: कुछ = रोग मुक्ति (AstroTalk: 'ज्ञात-अज्ञात सिद्धियां')।
- 2इंद्रियां तीक्ष्ण: दृष्टि/श्रवण/गंध = अधिक sensitive।
- 3नींद कम: कम नींद = अधिक ऊर्जा।
- 4आहार: सात्विक स्वतः — मांस/तामसिक = अरुचि।
सावधानी: बिना गुरु = शारीरिक/मानसिक कष्ट संभव। गुरु अनिवार्य।





