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कुंडलिनी जागरण📜 तंत्रालोक (अभिनवगुप्त) — कुंडलिनी शक्ति, कुलार्णव तंत्र, शिव स्वरोदय1 मिनट पठन

तंत्र साधना से कुंडलिनी कैसे जागृत होती है?

संक्षिप्त उत्तर

कुंडलिनी जागरण: मूलाधार में सर्पाकार सुषुप्त शक्ति। तंत्र से जागरण: मंत्र जप (बीज मंत्र — मूलाधार कंपन), प्राणायाम + बंध, ध्यान, गुरु शक्तिपात। लक्षण: रीढ़ में गर्मी, स्वतः मुद्राएं, आनंद। चेतावनी: बिना गुरु असंतुलित जागरण — कष्टदायक।

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विस्तृत उत्तर

तंत्र साधना से कुंडलिनी जागरण का वर्णन तंत्रालोक और कुलार्णव तंत्र में है:

कुंडलिनी क्या है

tंत्रालोक: कुंडलिनी = शरीर में स्थित शक्ति। मूलाधार चक्र (रीढ़ के आधार) में सर्पाकार सुषुप्त। जागृत होने पर — सुषुम्ना नाड़ी में ऊर्ध्वगमन — चक्र-चक्र जागृत।

तंत्र साधना से जागरण की विधि

1मंत्र जप

विशेष मंत्र (विशेषतः बीज मंत्र) — मूलाधार में कंपन उत्पन्न करते हैं।

2प्राणायाम

कुंभक प्राणायाम + बंध (मूल बंध, उड्डियान बंध) — प्राण शक्ति को नीचे की ओर धकेलना।

3ध्यान

मूलाधार पर ध्यान — कुंडलिनी शक्ति को जागृत करना।

4शक्तिपात

गुरु की शक्तिपात दीक्षा — तत्काल या क्रमिक कुंडलिनी जागरण।

जागरण के लक्षण

  • रीढ़ में गर्मी या विद्युत-सी अनुभूति
  • शरीर में स्वतः आसन या मुद्राएं
  • आनंद और प्रकाश का अनुभव
  • नाद (आंतरिक ध्वनि)

चेतावनी

बिना गुरु के असंतुलित कुंडलिनी जागरण = शारीरिक-मानसिक कष्ट। गुरु का मार्गदर्शन अनिवार्य।

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शास्त्रीय स्रोत
तंत्रालोक (अभिनवगुप्त) — कुंडलिनी शक्ति, कुलार्णव तंत्र, शिव स्वरोदय
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