विस्तृत उत्तर
जब कोई साधक गहरी एकाग्रता और पवित्रता के साथ लंबे समय तक मंत्र जप करता है, तो उसके शरीर के चक्र जाग्रत होने लगते हैं और उसे अतीन्द्रिय (इंद्रियों से परे) अनुभव होने लगते हैं। इन दिव्य संकेतों को साधना की सफलता का प्रतीक माना जाता है।
प्रमुख संकेतों में—आंखें बंद करने पर अचानक नीले, सफेद या सुनहरे रंग के प्रकाश की कौंध (Flash) दिखाई देना; बिना किसी फूल या अगरबत्ती के कमरे में चंदन, गुलाब या चमेली की तीव्र सुगंध (दिव्य गंध) का अनुभव होना; रीढ़ की हड्डी में अचानक विद्युत प्रवाह (करंट) जैसी रोमांचक अनुभूति होना (कुण्डलिनी जागरण का संकेत); और ध्यान के दौरान समय का भान न रहना शामिल है। कई बार साधक को अकारण ही आंखों से आंसू आने लगते हैं या एक असीम आनंद की लहर उठती है। इन संकेतों का प्रदर्शन दूसरों के सामने नहीं करना चाहिए।





