विस्तृत उत्तर
तंत्र साधना के अनुभवों का वर्णन कुलार्णव तंत्र और तंत्रालोक में मिलता है:
प्रारंभिक अनुभव (1-3 माह)
- 1मानसिक शांति — मन का भटकाव कम
- 2स्वप्न में देव दर्शन — इष्ट देव स्वप्न में आते हैं
- 3उत्साह — साधना में आनंद
मध्यवर्ती अनुभव (3-12 माह)
- 1प्रकाश का अनुभव — ध्यान में ज्योति
- 2नाद — भीतर से ध्वनि
- 3देह में कंपन — कुंडलिनी जागरण के पूर्व
- 4रीढ़ में गर्मी — प्राण ऊर्ध्वगामी
- 5वाणी का प्रभाव — जो कहें, हो जाए
उन्नत अनुभव
- 1देव का साक्षात्कार — ध्यान में स्पष्ट दर्शन
- 2कुंडलिनी जागरण — अत्यंत आनंद या कंपन
- 3अहंकार का विसर्जन — 'मैं' का भाव मिटना
- 4ब्रह्मानंद — शब्दातीत आनंद
कुलार्णव — सिद्धि लक्षण
साधना में स्वतः एकाग्रता, कामनाएं स्वतः पूर्ण, वाणी फलवती।
महत्वपूर्ण
तंत्रालोक: कोई भी अनुभव — गुरु को बताएं। स्वयं निर्णय न करें।





