विस्तृत उत्तर
जप या ध्यान करते समय अचानक आंखों से आंसू बहना आध्यात्मिक प्रगति और सच्ची भक्ति का एक अत्यंत उच्च लक्षण माना गया है।
सात्विक भाव — इसे 'अश्रु सात्विक भाव' कहा जाता है। जब मन पूरी तरह इष्ट देव के प्रेम में लीन हो जाता है, तब हृदय चक्र (अनाहत चक्र) सक्रिय होता है और यह प्रेम आंसुओं के रूप में छलक पड़ता है।
आंतरिक शुद्धि — जन्म-जन्मांतर के संचित संस्कार, मानसिक पीड़ाएं और अवरोध जब मंत्र की ऊर्जा से टूटते हैं, तो वे आंसुओं के माध्यम से शरीर से बाहर निकल जाते हैं। इसे गहरी भावनात्मक शुद्धि माना जाता है।
अनुभूति — इन आंसुओं में किसी प्रकार का दुःख नहीं होता, बल्कि एक अजीब सी शांति और हल्कापन महसूस होता है। साधक को इन्हें पोंछने या रोकने का प्रयास नहीं करना चाहिए।





