विस्तृत उत्तर
यह एक बहुत गहरा और बहुत कठिन क्षण है। जब भगवान पर से विश्वास उठने लगे — तब हम जीवन के सबसे गहरे प्रश्नों के सामने खड़े होते हैं। इस पीड़ा को समझा जा सकता है।
पहले यह जानें — कि विश्वास का उठना आपकी कमजोरी नहीं है। यह एक प्रश्न है — और सच्चे प्रश्न ही गहरी आस्था की ओर ले जाते हैं।
यह कब होता है — जब बहुत लंबे समय तक कष्ट रहे और कोई राहत न दिखे; जब लगे कि भगवान सुन नहीं रहे; जब किसी प्रियजन की मृत्यु हो; जब अन्याय को न्याय नहीं मिलता।
जो करें:
भगवान से झगड़ें — हाँ, झगड़ें। मीरा ने झगड़ा किया, कुंती ने गिले किए, अय्यूब (बाइबल) ने भगवान को प्रश्न किए। यह संवाद है — और संवाद रिश्ते को तोड़ता नहीं, गहरा करता है। 'तुम हो तो फिर यह सब क्यों' — यह प्रश्न बोलें।
दूसरों के अनुभव सुनें — किसी ऐसे व्यक्ति से बात करें जिसने कष्ट झेला और फिर भगवान में विश्वास पाया।
कर्म में लगे रहें — जब आस्था डगमगाए तो भी सत्य, प्रेम और सेवा का मार्ग न छोड़ें। ये गुण स्वयं भगवान हैं — इनसे टूटना मत।
समय दें — आस्था का संकट एक समय होता है। अनेक महान आत्माओं ने इससे गुजरकर और गहरी भक्ति पाई।
याद रखें — भगवान आपके प्रश्नों से नहीं घबराते। वे डर नहीं जाते। वे उत्तर देते हैं — पर अपने समय और तरीके से।





