विस्तृत उत्तर
यह प्रश्न हर उस मन में उठता है जो कभी गहरी तकलीफ में रहा हो। और इसका उत्तर न केवल शास्त्रों में है, बल्कि करोड़ों भक्तों के जीवन-अनुभव में भी।
शास्त्रों का उत्तर — भगवद गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं — 'अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते। तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्॥' — जो लोग अनन्य भाव से मुझे भजते हैं, उनका योग (प्राप्ति) और क्षेम (रक्षा) मैं स्वयं करता हूँ। यह भगवान का स्वयं का वचन है।
भगवान सर्वज्ञ हैं — जो सबके हृदय में साक्षी रूप से विराजमान है, जिसे 'अन्तर्यामी' कहा जाता है, वह क्या आपकी पुकार नहीं सुनेगा? वह तो आपके मुँह खोलने से पहले ही जानता है।
प्रार्थना का फल हमेशा तत्काल क्यों नहीं दिखता — इसके कई कारण हो सकते हैं। जो माँगा जा रहा है वह आपके लिए उचित समय पर आएगा। कभी-कभी जो हम माँगते हैं उससे बेहतर कुछ और मिलता है। कभी प्रारब्ध कर्म उसमें विलंब करते हैं। और कभी हमारी भक्ति को और गहरा करने के लिए प्रतीक्षा आवश्यक होती है।
प्रार्थना का असली फल — सच्ची प्रार्थना का तत्काल फल यह है कि मन को शांति मिलती है। भय कम होता है। एक आंतरिक बल उत्पन्न होता है। यह भगवान का तत्काल उत्तर है।
संत मीराबाई का अनुभव — मीरा ने कहा — 'मेरे तो गिरिधर गोपाल, दूसरो न कोई।' उन्हें जहर दिया गया, पर वे बचीं। उनकी प्रार्थना का उत्तर भगवान ने हर बार दिया।
विश्वास करें — भगवान सुनते हैं। वे देरी करते हैं लेकिन अनदेखा नहीं करते।





