विस्तृत उत्तर
भगवान शिव 'आशुतोष' (शीघ्र प्रसन्न होने वाले) हैं। शिव पुराण कथा के अनुसार शिव ही ऐसे भगवान हैं जो शीघ्र प्रसन्न होकर मनचाहा वर देते हैं — वे यह नहीं देखते कि भक्त मनुष्य है, राक्षस है या किसी अन्य योनि का।
सबसे सरल उपाय:1. एक लोटा जल (सर्वसरलतम)
शिव पुराण: 'भगवान शिव एक लोटा जल से प्रसन्न हो जाते हैं।' शिवलिंग पर 'ॐ नमः शिवाय' बोलते हुए जल चढ़ाना — यही सबसे सरल उपाय है। न कोई विशेष सामग्री चाहिए, न कोई कठिन विधि।
1'ॐ नमः शिवाय' जप
पंचाक्षर मंत्र — कहीं भी, कभी भी, बिना किसी विधि के जप संभव। 108 बार या यथाशक्ति।
2बेलपत्र
शिव को सबसे प्रिय। तीन पत्ती का अखंडित बेलपत्र शिवलिंग पर उल्टा रखें।
3शिव को प्रिय 11 सामग्री
जल, बिल्वपत्र, आंकड़ा, धतूरा, भांग, कर्पूर, दूध, चावल, चंदन, भस्म, रुद्राक्ष।
4सच्ची भक्ति — सबसे बड़ा उपाय
भगवान शिव को अगर चावल के मात्र 4 दाने भी भाव से अर्पित करें तो वे प्रसन्न होकर वरदान देते हैं।' सार: शिव भाव के भूखे हैं, सामग्री के नहीं।
5आचरण
क्रोध, अहंकार और तामसिक भोजन से दूर रहना। सत्य बोलना, दया रखना — शिव को प्रसन्न करने का आंतरिक उपाय।
सार: शिव = भोलेभंडारी। एक लोटा जल + सच्ची भक्ति = शिव प्रसन्न। जटिल विधि की आवश्यकता नहीं।
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