विस्तृत उत्तर
शिव को प्रसन्न करना शास्त्रों में सबसे सरल बताया गया है — वे 'आशुतोष' (शीघ्र प्रसन्न होने वाले) हैं। परंतु कुछ बाधाएं भक्त को शिव-कृपा से वंचित रखती हैं:
सबसे बड़ी बाधा — अहंकार (गर्व)
शिव पुराण में अहंकार को सबसे बड़ा शत्रु बताया गया है। शिव स्वयं निरहंकार हैं — वे श्मशान में रहते हैं, भस्म लगाते हैं, विष पीकर नीलकंठ हुए। अहंकारी व्यक्ति शिव-तत्व से सर्वाधिक दूर होता है।
अन्य प्रमुख बाधाएं
- 1अश्रद्धा और संदेह: भक्ति में संदेह करना सबसे बड़ा दोष। 'संशयात्मा विनश्यति' (भगवद्गीता)।
- 2अनियमितता: पूजा आरंभ करके छोड़ देना।
- 3दिखावा और पाखंड: बाह्य दिखावे की पूजा शिव को अप्रिय।
- 4क्रूरता और हिंसा: प्राणियों से क्रूरता करने वाला शिव कृपा का पात्र नहीं।
- 5अपात्र निंदा: दूसरों की निंदा और ईर्ष्या।
- 6काम-क्रोध-लोभ: ये तीनों मन के विकार भक्ति में बाधक।
- 7गुरु अपमान: गुरु का अपमान शिव का अपमान है।
शिव पुराण का मार्गदर्शन
भगवान शिव केवल एक चीज चाहते हैं — सच्चा, निष्कपट भक्तिभाव। जो बिना किसी स्वार्थ के, बिना अहंकार के, बिना दिखावे के शिव को पुकारता है — शिव उसके पास दौड़े चले आते हैं।
सार: अहंकार त्यागें, श्रद्धा रखें, नियमित रहें, सच्चे मन से पुकारें — शिव अवश्य प्रसन्न होंगे।





