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शिव भक्ति📜 शिव पुराण, शैव आगम, विभूति महात्म्य1 मिनट पठन

शिव भक्त को विभूति कैसे लगानी चाहिए और कब?

संक्षिप्त उत्तर

तीन अंगुलियों से ललाट पर बाएं→दाहिने तीन क्षैतिज रेखाएं = त्रिपुंड। कब: स्नान बाद/पूजा पूर्व/सोमवार/शिवरात्रि। स्रोत: यज्ञ भस्म सर्वोत्तम, मंदिर प्रसाद शुभ। लाभ: पाप नाश, रक्षा, शिव कृपा।

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विस्तृत उत्तर

विभूति (भस्म/भभूत) लगाने की विधि:

कैसे लगाएं — त्रिपुंड विधि

  1. 1दाहिने हाथ की तीन अंगुलियों (मध्यमा, अनामिका, तर्जनी) से भस्म लें।
  2. 2ललाट पर बाएं से दाहिने तीन समानांतर क्षैतिज रेखाएं खींचें = त्रिपुंड
  3. 3त्रिपुंड = त्रिदेव (ब्रह्मा-विष्णु-महेश) / तीन गुण (सत्व-रज-तम) / तीन लोक (स्वर्ग-पृथ्वी-पाताल)।
  4. 4कुछ परंपराओं में 16 स्थानों पर त्रिपुंड: ललाट, छाती, दोनों भुजाएं, कंठ, पेट, पीठ आदि।

कब लगाएं

  • प्रतिदिन: स्नान के बाद, पूजा से पहले।
  • शिव पूजा में: पूजा आरंभ पर अवश्य।
  • सोमवार/शिवरात्रि/सावन: विशेष।
  • प्रदोष काल: संध्या पूजा में।

विभूति के स्रोत

  • यज्ञ भस्म (श्रौत) — सर्वोत्तम।
  • गोबर कंडे + पंचवृक्ष काष्ठ भस्म — सामान्य।
  • मंदिर प्रसाद भस्म — शुभ।

लाभ (शिव पुराण)

  • पाप नाश, नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा।
  • शिव कृपा प्राप्ति।
  • वैराग्य और आध्यात्मिक ऊर्जा।
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शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण, शैव आगम, विभूति महात्म्य
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