विस्तृत उत्तर
अष्ट सात्विक भाव = दिव्य प्रेम के 8 लक्षण (SanatanPrabhat/KripaluVedicWisdom verified):
श्लोक (SanatanPrabhat — भरतमुनि)
स्वेदः स्तंभोऽथ रोमांचः स्वरभंगोऽथ वेपथुः।
वैवर्ण्यमश्रुप्रलय इत्यष्टौ सात्विका मताः॥'
| क्र. | भाव | अर्थ |
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| 1 | स्वेद | पसीना छूटना |
| 2 | स्तंभ | शरीर जड़ (खंभे जैसा) |
| 3 | रोमांच | रोंगटे खड़े |
| 4 | स्वरभंग | आवाज गद्गद/रुंधना |
| 5 | कंप (वेपथु) | शरीर कांपना |
| 6 | वैवर्ण्य | चेहरा पीला/रंग बदलना |
| 7 | अश्रु | आंखों से अविरल आंसू |
| 8 | प्रलय (मूर्च्छा) | अचेत/बेहोश |
श्रेणियां (KripaluVedicWisdom): 1-2 भाव = धूमायित। 2-3 = ज्वलित। 4-5 = दीप्त। 7-8 = उद्दीप्त। 8 एक साथ = सुद्दीप्त (अत्यंत दुर्लभ)।
चैतन्य महाप्रभु: कलियुग = 8 एक साथ = चैतन्य (KripaluVedicWisdom)।





