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भक्ति📜 शोध: SanatanPrabhat (श्लोक+8 नाम), KripaluVedicWisdom (श्रेणियां), भरतमुनि नाट्यशास्त्र1 मिनट पठन

भक्ति में अष्ट सात्विक भाव क्या हैं?

संक्षिप्त उत्तर

भरत श्लोक (SanatanPrabhat): स्वेद(पसीना), स्तंभ(जड़), रोमांच(रोंगटे), स्वरभंग(गद्गद), कंप, वैवर्ण्य(रंग↓), अश्रु, प्रलय(अचेत)। श्रेणी: धूमायित→ज्वलित→दीप्त→उद्दीप्त→सुद्दीप्त। चैतन्य=8 एक साथ।

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विस्तृत उत्तर

अष्ट सात्विक भाव = दिव्य प्रेम के 8 लक्षण (SanatanPrabhat/KripaluVedicWisdom verified):

श्लोक (SanatanPrabhat — भरतमुनि)

स्वेदः स्तंभोऽथ रोमांचः स्वरभंगोऽथ वेपथुः।

वैवर्ण्यमश्रुप्रलय इत्यष्टौ सात्विका मताः॥'

| क्र. | भाव | अर्थ |

|------|------|------|

| 1 | स्वेद | पसीना छूटना |

| 2 | स्तंभ | शरीर जड़ (खंभे जैसा) |

| 3 | रोमांच | रोंगटे खड़े |

| 4 | स्वरभंग | आवाज गद्गद/रुंधना |

| 5 | कंप (वेपथु) | शरीर कांपना |

| 6 | वैवर्ण्य | चेहरा पीला/रंग बदलना |

| 7 | अश्रु | आंखों से अविरल आंसू |

| 8 | प्रलय (मूर्च्छा) | अचेत/बेहोश |

श्रेणियां (KripaluVedicWisdom): 1-2 भाव = धूमायित। 2-3 = ज्वलित। 4-5 = दीप्त। 7-8 = उद्दीप्त। 8 एक साथ = सुद्दीप्त (अत्यंत दुर्लभ)।

चैतन्य महाप्रभु: कलियुग = 8 एक साथ = चैतन्य (KripaluVedicWisdom)।

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शास्त्रीय स्रोत
शोध: SanatanPrabhat (श्लोक+8 नाम), KripaluVedicWisdom (श्रेणियां), भरतमुनि नाट्यशास्त्र
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