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भक्ति📜 भक्ति रसामृत सिंधु, नवधा भक्ति1 मिनट पठन

भक्ति में दास्य भाव क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

ईश्वर=स्वामी, मैं=दास। हनुमान (सर्वोच्च — 'राम काज बिनु कहाँ विश्राम'), लक्ष्मण, गरुड़। 'तेरी इच्छा=सर्वस्व।' अहंकार↓↓, विनम्रता=मोक्ष द्वार।

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विस्तृत उत्तर

दास्य भाव = ईश्वर = स्वामी, मैं = दास/सेवक:

क्या है: 'मैं तेरा दास। तू मेरा स्वामी। तेरी सेवा = मेरा जीवन।' विनम्रता + समर्पण।

उदाहरण

  • हनुमान-राम: 'दास हनुमान' = दास्य भक्ति सर्वोच्च। 'राम काज किन्हें बिनु मोहि कहाँ विश्राम।'
  • लक्ष्मण-राम: 14 वर्ष सेवा = दास्य।
  • गरुड़-विष्णु: वाहन = सेवक = दास्य।

भाव: 'प्रभु आदेश = मेरा कर्तव्य। मेरी इच्छा = शून्य। तेरी इच्छा = सर्वस्व।'

लाभ: अहंकार ↓↓ (दास = अहंकार विपरीत)। सेवा = कर्म योग। विनम्रता = मोक्ष द्वार।

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शास्त्रीय स्रोत
भक्ति रसामृत सिंधु, नवधा भक्ति
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