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भक्ति प्रश्नोत्तर — 4 प्रश्न

भक्ति से जुड़े 4 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 4 प्रश्न

भक्ति में अष्ट सात्विक भाव क्या हैं?

भरत श्लोक: स्वेद(पसीना), स्तंभ(जड़), रोमांच(रोंगटे), स्वरभंग(गद्गद), कंप, वैवर्ण्य(रंग↓), अश्रु, प्रलय(अचेत)। श्रेणी: धूमायित→ज्वलित→दीप्त→उद्दीप्त→सुद्दीप्त। चैतन्य=8 एक साथ।

अष्टसात्विकभाव
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भक्ति में माधुर्य भाव क्या है?

ईश्वर=प्रेमी — सर्वोच्च भक्ति। राधा-कृष्ण, मीरा ('गिरधर गोपाल'), आंडाल, चैतन्य। आध्यात्मिक प्रेम (शारीरिक नहीं)। 5 भाव: शांत→दास्य→सख्य→वात्सल्य→**माधुर्य**।

माधुर्यभावक्या
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भक्ति में दास्य भाव क्या है?

ईश्वर=स्वामी, मैं=दास। हनुमान (सर्वोच्च — 'राम काज बिनु कहाँ विश्राम'), लक्ष्मण, गरुड़। 'तेरी इच्छा=सर्वस्व।' अहंकार↓↓, विनम्रता=मोक्ष द्वार।

दास्यभावक्या
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भक्ति में सख्य भाव क्या है?

ईश्वर=मित्र। अर्जुन-कृष्ण (गीता), सुदामा (पोहा→महल), गोपबाल। 'दोस्त से सब कहूंगा — खुशी/दुख/शिकायत।' 5 भाव: शांत→दास्य→**सख्य**→वात्सल्य→माधुर्य।

सख्यभावक्या
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भक्ति — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर भक्ति श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

विषय को सही क्रम से पढ़ें

भक्ति को गहराई से समझने का तरीका

भक्ति प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

4 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।