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शुभ मुहूर्त प्रश्नोत्तर — 33 प्रश्न

शुभ मुहूर्त से जुड़े 33 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 33 प्रश्न

दक्षिण काली यंत्र की स्थापना के लिए कौन सी तिथि शुभ है?

दक्षिण काली यंत्र स्थापना की शुभ तिथि: चैत्र, आषाढ़ या माघ मास की अष्टमी तिथि।

दक्षिण काली यंत्रचैत्र आषाढ़ माघअष्टमी तिथि
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माँ काली की पूजा के लिए कौन सा समय सबसे शुभ है?

काली पूजा का शुभ काल: कार्तिक अमावस्या (काली पूजा/दीपावली) = अत्यंत शुभ। निशिता काल (मध्यरात्रि) = विशेष फलदायी। ग्रहण काल, होली की रात्रि। कृष्ण पक्ष की अष्टमी या चतुर्दशी।

काली पूजा मुहूर्तकार्तिक अमावस्यानिशिता काल
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माँ तारा के मंत्र जप के लिए सबसे उत्तम समय कौन सा है?

तारा मंत्र जप का उत्तम समय: रात्रि 10 बजे से सुबह 3 बजे के बीच। विशेषकर रात्रि 11:48 से 12:20 के बीच = सर्वाधिक उत्तम।

मंत्र जप समयरात्रि 10 से 311:48 से 12:20
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माँ तारा की साधना कब करनी चाहिए?

तारा साधना का शुभ काल: माघ गुप्त नवरात्रि का दूसरा दिन (विशेष शुभ)। अर्धरात्रि = श्रेष्ठ फलदायी। किसी भी शुभ दिन, मंगलवार या शुक्ल पक्ष पंचमी से प्रारंभ।

तारा साधना मुहूर्तमाघ गुप्त नवरात्रिअर्धरात्रि
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माँ त्रिपुर सुंदरी की साधना कब करनी चाहिए?

माँ त्रिपुर सुंदरी साधना का शुभ काल: शुक्रवार = विशेष शुभ। गुप्त नवरात्रि और पूर्णिमा भी उपयुक्त। अन्य शुभ तिथियों पर भी साधना की जा सकती है।

त्रिपुर सुंदरी मुहूर्तशुक्रवारगुप्त नवरात्रि
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माँ भुवनेश्वरी की साधना कब करनी चाहिए?

भुवनेश्वरी साधना का शुभ काल: सफला एकादशी, गुप्त नवरात्रि विशेष शुभ। किसी भी शुभ दिन प्रारंभ करें। उत्तम समय = रात्रि 10 बजे के बाद।

भुवनेश्वरी मुहूर्तरात्रि 10 बजेसफला एकादशी
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छिन्नमस्ता साधना के लिए कौन से दिन शुभ हैं?

छिन्नमस्ता साधना के शुभ दिन: (1) वैशाख शुक्ल चतुर्दशी = जयंती (विशेष शुभ), (2) गुप्त नवरात्रि का पाँचवाँ दिन, (3) प्रदोषकाल (कुछ परंपराओं में)।

गुप्त नवरात्रिपाँचवाँ दिनछिन्नमस्ता जयंती
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माँ छिन्नमस्ता की जयंती कब होती है?

माँ छिन्नमस्ता जयंती: वैशाख मास, शुक्ल पक्ष, चतुर्दशी तिथि। यह साधना के लिए विशेष शुभ तिथि है।

छिन्नमस्ता जयंतीवैशाख शुक्ल चतुर्दशीसाधना तिथि
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माँ त्रिपुर भैरवी की साधना कब करनी चाहिए?

माँ त्रिपुर भैरवी साधना का शुभ काल: प्रातः काल = विशेष फलदायी। किसी भी शुभ समय, सुबह या शाम, साधना प्रारंभ की जा सकती है।

त्रिपुर भैरवी मुहूर्तप्रातः कालशुभ समय
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धूमावती साधना के लिए कौन से दिन और समय शुभ हैं?

धूमावती साधना के शुभ दिन: (1) ज्येष्ठ शुक्ल अष्टमी = जयंती (अत्यंत शुभ), (2) किसी भी महीने का कृष्ण पक्ष शनिवार, (3) गुप्त नवरात्रि।

धूमावती साधना दिनशनिवार कृष्ण पक्षगुप्त नवरात्रि
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माँ धूमावती की जयंती कब मनाई जाती है?

माँ धूमावती जयंती: ज्येष्ठ मास, शुक्ल पक्ष, अष्टमी तिथि। यह साधना के लिए अत्यंत शुभ तिथि है।

धूमावती जयंतीज्येष्ठ शुक्ल अष्टमीसाधना तिथि
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माँ बगलामुखी की साधना कब करनी चाहिए?

बगलामुखी साधना का शुभ काल: गुप्त नवरात्रि में विशेष शुभ। यंत्र स्थापना = शुक्रवार। साधना का उत्तम समय = रात्रि 9 से 12 बजे के बीच।

बगलामुखी साधना मुहूर्तगुप्त नवरात्रिशुक्रवार
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उच्छिष्ट मातंगी और राज मातंगी साधना के मुहूर्त में क्या अंतर है?

अंतर: उच्छिष्ट मातंगी = सोमवार, रात्रि 9 बजे के बाद। राज मातंगी = रात्रि 10 बजे के बाद या ब्रह्म मुहूर्त में।

उच्छिष्ट मातंगी मुहूर्तराज मातंगी मुहूर्तरात्रि 9
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मातंगी साधना के लिए कौन सी विशेष तिथियाँ शुभ हैं?

मातंगी साधना की शुभ तिथियाँ: (1) अक्षय तृतीया = मातंगी जयंती, (2) वैशाख पूर्णिमा = मातंगी सिद्धि दिवस, (3) गुप्त नवरात्रि का नौवाँ दिन = माँ मातंगी की पूजा का विशेष दिन।

मातंगी जयंतीअक्षय तृतीयावैशाख पूर्णिमा
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माँ मातंगी की साधना कब करनी चाहिए?

मातंगी साधना का समय: उच्छिष्ट मातंगी = सोमवार, रात्रि 9 बजे के बाद। राज मातंगी = रात्रि 10 बजे के बाद या ब्रह्म मुहूर्त। सामान्य मातंगी साधना = रात्रि 9 बजे के बाद।

मातंगी साधना मुहूर्तरात्रि 9 बजेसोमवार
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वसंत पंचमी पर पूजा कितने बजे से कितने बजे तक करें?

वसंत पंचमी पर पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय = सूर्योदय के बाद पूर्वाह्न से मध्याह्न तक। 2026 में 23 जनवरी: प्रातः 07:15 से दोपहर 12:50 बजे तक। सभी अनुष्ठान और विद्यारंभ इसी अवधि में।

पूजा समय07:1512:50
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वसंत पंचमी 2026 में कब है?

वसंत पंचमी 2026: 23 जनवरी, शुक्रवार। पंचमी तिथि: 23 जनवरी 02:28 से 24 जनवरी 01:46 तक। पूजा का शास्त्रसम्मत मुहूर्त: प्रातः 07:15 से दोपहर 12:50 तक।

वसंत पंचमी 202623 जनवरीशुक्रवार
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वसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?

शुभ मुहूर्त: माघ शुक्ल पंचमी जो मध्याह्न को स्पर्श करे। पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय = सूर्योदय के बाद पूर्वाह्न से मध्याह्न क्षण तक। यदि दो दिन हो तो 'पूर्वविद्धा' (चतुर्थी युक्त पंचमी) ग्राह्य।

सरस्वती पूजा मुहूर्तमध्याह्नधर्मसिंधु
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2026 में चैत्र नवरात्रि कलश स्थापना का मुहूर्त क्या है?

2026 चैत्र नवरात्रि: 19 मार्च (गुरुवार)। सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त: 06:52 से 07:43 (मीन लग्न + शुद्ध प्रतिपदा)। अभिजित मुहूर्त: 12:05 से 12:53। राहुकाल: 14:48 से 16:18 (वर्जित)। 06:52 से पहले अमावस्या प्रभाव — उससे पहले न करें।

2026 कलश स्थापना मुहूर्त19 मार्चमीन लग्न
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कलश स्थापना कब नहीं करनी चाहिए?

कलश स्थापना वर्जित है: चित्रा नक्षत्र में, वैधृति योग में, रात्रि के अंधकार में, अमावस्या तिथि में (क्षीण चंद्रमा देवी के सत्वगुण आवाह्न के अनुकूल नहीं) और राहुकाल में।

कलश स्थापना निषेधचित्रा नक्षत्रवैधृति योग
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कलश स्थापना के लिए कौन सा लग्न शुभ है?

कलश स्थापना के लिए शुभ लग्न = द्विस्वभाव लग्न: मीन, मिथुन, कन्या, धनु। ये लग्न स्थिरता और गतिशीलता का आदर्श संतुलन देती हैं — 9 दिनों की ऊर्जा धारण के लिए आवश्यक। 2026 में 19 मार्च: मीन लग्न (06:26 से 07:43)।

द्विस्वभाव लग्नमीन मिथुनकन्या धनु
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अभिजित मुहूर्त में कलश स्थापना कर सकते हैं?

हाँ। यदि प्रातःकाल का समय न मिले तो अभिजित मुहूर्त (मध्याह्न काल) में कलश स्थापना की जा सकती है — यह अत्यंत शुभ और दोष-निवारक विकल्प है। 2026 में 19 मार्च: दोपहर 12:05 से 12:53 बजे तक।

अभिजित मुहूर्तमध्याह्न कालवैकल्पिक मुहूर्त
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कलश स्थापना सुबह किस समय करनी चाहिए?

कलश स्थापना का सर्वश्रेष्ठ समय = प्रतिपदा का प्रथम एक-तिहाई भाग (प्रातःकाल)। 2026 में 19 मार्च: प्रातः 06:52 से 07:43 (मीन लग्न + शुद्ध प्रतिपदा का संयोग)। 06:52 से पहले अमावस्या प्रभाव — उससे पहले न करें।

कलश स्थापना समयप्रातःकालप्रतिपदा
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कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त कैसे निकालें?

मुहूर्त के नियम (निर्णयसिन्धु): प्रतिपदा तिथि की व्याप्ति अनिवार्य। सर्वश्रेष्ठ = प्रतिपदा का प्रथम एक-तिहाई भाग (प्रातःकाल)। विकल्प = अभिजित मुहूर्त (मध्याह्न)। शुभ लग्न = द्विस्वभाव (मीन, मिथुन, कन्या, धनु)।

कलश स्थापना मुहूर्तनिर्णयसिन्धुप्रतिपदा
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देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु को कैसे जगाते हैं?

जाग्रत मंत्र: 'उत्तिष्ठोत्तिष्ठ गोविन्द त्यज निद्रां जगत्पते...' शंख, घंटा, मृदंग, नगाड़े बजाते हैं। सूप या थाली बजाना लोक-परंपरा। इस मंत्र उच्चारण से चातुर्मास का समापन और विवाह आदि मांगलिक कार्यों का आरंभ शास्त्रसम्मत होता है।

भगवान जागरण मंत्रउत्तिष्ठ गोविंदशंख घंटा
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तुलसी विवाह का शुभ समय क्या है?

तुलसी विवाह का शुभ समय: गोधूलि बेला / संध्याकाल — सूर्यास्त के समय या सायं 6 से 8 बजे के मध्य। 'प्रदोष व्यापिनी' तिथि शास्त्रसम्मत। इस समय देवों का जागरण पूर्ण और सकारात्मक ऊर्जा चरमोत्कर्ष पर।

तुलसी विवाह मुहूर्तगोधूलि बेलासंध्याकाल
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तुलसी विवाह कब होता है — कौन सी तिथि?

तुलसी विवाह: कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी (चातुर्मास समाप्ति का दिन)। धर्मसिन्धु: एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा के मध्य किसी भी दिन संपन्न कर सकते हैं। द्वादशी को करना अधिक श्रेयस्कर।

तुलसी विवाह तिथिकार्तिक एकादशीदेवउठनी
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राहुकाल में गाड़ी की पूजा क्यों नहीं करनी चाहिए?

धर्मसिंधु: राहुकाल में किया गया कोई भी शुभ कार्य भविष्य में 'अरिष्ट' (अनिष्ट) का कारण बन सकता है। राहु = नकारात्मक ऊर्जा और अनिश्चितता का प्रतीक। वाहन पूजन के लिए यह समय सर्वथा अनुचित।

राहुकालअरिष्टधर्मसिंधु
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वाहन पूजन के लिए कौन से नक्षत्र शुभ हैं?

चल नक्षत्र (सुरक्षित यात्रा के लिए): पुनर्वसु, स्वाति, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा। विशेष कल्याणकारी: हस्त, पुष्य, अश्विनी, रेवती — इनमें वाहन पूजन से वाहन की आयु बढ़ती है।

वाहन पूजन नक्षत्रचर नक्षत्रपुनर्वसु स्वाति
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किस दिन गाड़ी नहीं खरीदनी चाहिए?

गाड़ी नहीं खरीदनी चाहिए: अमावस्या, चतुर्थी (4), नवमी (9), चतुर्दशी (14) पर। राहुकाल में कोई भी शुभ कार्य न करें। भद्रा और पंचक दोष से भी बचें — खासकर लोहे से बने वाहन के लिए।

गाड़ी कब नहीं खरीदेंअमावस्यारिक्ता तिथि
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वाहन पूजन के लिए कौन सी तिथियाँ शुभ हैं?

शुभ तिथियाँ: 1, 3, 5, 6, 8, 10, 11, 13, 15 (शुक्ल पक्ष)। त्याज्य तिथियाँ: अमावस्या, चतुर्थी (4), नवमी (9), चतुर्दशी (14) — ये 'रिक्ता' तिथियाँ मानसिक अस्थिरता और अवरोध उत्पन्न करती हैं।

वाहन पूजन तिथिशुक्ल पक्षशुभ तिथि
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गाड़ी खरीदने का शुभ दिन कौन सा है?

गाड़ी खरीदने के लिए शुभ दिन: सोमवार (चंद्र = शांति), बुधवार (बुध = बुद्धि), गुरुवार (गुरु = सुरक्षा), शुक्रवार (शुक्र = सुख-समृद्धि)। शुक्ल पक्ष की तिथियाँ भी अत्यंत प्रभावी।

गाड़ी खरीदने का शुभ दिनवारसोमवार बुधवार
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शुभ मुहूर्त — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर शुभ मुहूर्त श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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शुभ मुहूर्त को गहराई से समझने का तरीका

शुभ मुहूर्त प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

33 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।