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नवरात्रि के नियम और निषेध प्रश्नोत्तर — 5 प्रश्न

नवरात्रि के नियम और निषेध से जुड़े 5 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 5 प्रश्न

कलश और अखंड ज्योति हो तो घर खाली छोड़ सकते हैं?

नहीं। घर में कलश और अखंड ज्योति स्थापित हो तो घर को एक क्षण के लिए भी खाली या सूना नहीं छोड़ना चाहिए। यह नवरात्रि का सबसे महत्वपूर्ण नियम है।

घर खालीकलश अखंड ज्योतिनवरात्रि नियम
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अखंड ज्योति के नियम क्या हैं?

अखंड ज्योति के नियम: 9 दिन-9 रात एक क्षण भी न बुझे। निरंतर घी/तेल डालें। वायु से रक्षा करें। घर में कलश + अखंड ज्योति हो तो घर एक क्षण भी खाली न छोड़ें।

अखंड ज्योति नियमनौ दिनघी तेल
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नवरात्रि में ब्रह्मचर्य क्यों जरूरी है?

नवरात्रि में ब्रह्मचर्य = आध्यात्मिक ऊर्जा के संरक्षण और कुंडलिनी जागरण के लिए अनिवार्य। कलह, ईर्ष्या, क्रोध, काम, निंदा — ये तपस्या की ऊर्जा क्षीण करते हैं। शरीर, मन और वातावरण में पूर्ण शुद्धता।

नवरात्रि ब्रह्मचर्यऊर्जा संरक्षणकुंडलिनी
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नवरात्रि में क्या नहीं खाना चाहिए?

नवरात्रि में वर्जित: मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज और सामान्य अन्न (गेहूं, चावल) पूर्णतः निषिद्ध। ये तामसिक भोजन तपस्या की ऊर्जा को क्षीण कर देते हैं।

नवरात्रि वर्जित आहारमांस मदिरालहसुन प्याज
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नवरात्रि व्रत में क्या खा सकते हैं?

नवरात्रि व्रत में खा सकते हैं: कुट्टू, सिंघाड़ा, राजगिरा, ताजे फल, दूध, दही, पनीर और सेंधा नमक (Rock salt)। पूरे 9 दिन केवल सात्विक आहार।

नवरात्रि व्रत आहारकुट्टू सिंघाड़ासेंधा नमक
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नवरात्रि के नियम और निषेध — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर नवरात्रि के नियम और निषेध श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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नवरात्रि के नियम और निषेध को गहराई से समझने का तरीका

नवरात्रि के नियम और निषेध प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

5 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।