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शिव भक्त कथा प्रश्नोत्तर — 14 प्रश्न

शिव भक्त कथा से जुड़े 14 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 14 प्रश्न

वृंदा ने शाप में विष्णु को क्या दिया

वृंदा ने विष्णु को दो श्राप दिए — (1) पत्नी-वियोग सहना होगा (राम-अवतार में सीता-हरण हुआ), (2) पत्थर बनोगे (शालिग्राम)। वृंदा के राख से तुलसी प्रकट हुई — विष्णु ने उन्हें 'विष्णुप्रिया' तुलसी का वरदान दिया।

वृंदा शापसीता हरणशालिग्राम
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वृंदा के सतीत्व भंग होने के बाद शिव ने जलंधर का वध कैसे किया

वृंदा का सतीत्व भंग होते ही जलंधर की शक्ति क्षीण हो गई। भगवान शिव ने अपने त्रिशूल से जलंधर का वध किया। शिव-तेज से जन्मा था इसलिए शिव ने ही वह शक्ति वापस ली — अहंकार और दुराचरण का नाश अनिवार्य है।

जलंधर वधशिव त्रिशूलसतीत्व भंग
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विष्णु ने जलंधर का वेश धारण करके क्या किया

विष्णु ने ऋषि वेश में वृंदा से संपर्क किया, मायावी राक्षसों को भस्म कर प्रभावित किया, फिर मृत जलंधर के शरीर में प्रवेश कर लिया। वृंदा को छल का आभास नहीं हुआ, उसका सतीत्व भंग हुआ और तत्क्षण शिव ने जलंधर का वध किया।

विष्णु जलंधर वेशवृंदा छलसतीत्व भंग
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वृंदा का सतीत्व जलंधर की रक्षा कैसे करता था

वृंदा की पतिव्रता-शक्ति जलंधर के चारों ओर अभेद्य दिव्य कवच था। जब-जब युद्ध में जलंधर घायल होता, सतीत्व की शक्ति उसे पुनर्जीवित करती। शिव स्वयं युद्ध करते रहे पर वृंदा का सतीत्व अखंड तक जलंधर अवध्य रहा।

वृंदा सतीत्वपतिव्रता शक्तिजलंधर रक्षा
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जलंधर अजेय क्यों था उसकी शक्ति का रहस्य क्या था

जलंधर की अजेयता के दो कारण — शिव-तेज से जन्म (देवताओं से शक्तिशाली) और पत्नी वृंदा का अखंड सतीत्व जो अभेद्य दिव्य कवच था। जब तक वृंदा का सतीत्व अखंड था, शिव भी उसे युद्ध में नहीं जीत सके।

जलंधर अजेयवृंदा सतीत्वशक्ति रहस्य
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जलंधर कौन था और उसकी उत्पत्ति कैसे हुई

जलंधर की उत्पत्ति इंद्र के अपमान पर कुपित शिव के तेज से समुद्र में हुई। सिंधु-पुत्र होने से 'जलंधर' नाम पड़ा। शिव-तेज से उत्पन्न होने से देवताओं से शक्तिशाली था। दैत्यराज कालनेमी की पुत्री वृंदा से विवाह हुआ।

जलंधरशिव तेजसमुद्र
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शिव भक्त धनपाल की कथा शिव पुराण में क्या है

पापी वैश्य धनपाल महाशिवरात्रि की रात अनायास शिव मंदिर के पास जागता रहा और अनजाने में जागरण हो गया। इस अनायास जागरण मात्र से उसके समस्त पाप नष्ट हुए। यह शिव की असीम करुणा का प्रमाण है।

धनपालमहाशिवरात्रि जागरणपाप नाश
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शिव के परम भक्त चंडेश्वर की कथा क्या है

ग्वाला बालक चंड प्रतिदिन शिवलिंग पर गाय के दूध से पूजा करता था। पिता ने गाय को लात मारी — चंड ने शिव के अपमान पर क्रोध में पिता पर प्रहार किया। शिव प्रसन्न होकर 'चंडेश्वर' नाम देकर गणाधिपति बनाया।

चंडेश्वरचरवाहा बालकगाय दूध पूजा
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उपमन्यु ने शिव से क्या वर प्राप्त किया

उपमन्यु ने इंद्र की परीक्षा में शिव-निंदा सहन नहीं की। शिव ने प्रसन्न होकर 'क्षीर सागर' (दूध का अटूट स्रोत) का वर दिया। बाद में उपमन्यु ने भगवान श्रीकृष्ण को शैव दीक्षा भी दी।

उपमन्युक्षीर सागरइंद्र परीक्षा
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शिव और यम का युद्ध मार्कंडेय के लिए कैसे हुआ

यमराज ने मार्कंडेय पर यमपाश फेंका जो शिवलिंग सहित लपेट गया। क्रोधित शिव प्रकट हुए, यम को भगाया और यम को शर्त रखी — भक्त की पूजा के समय मृत्यु का अधिकार नहीं। इसीलिए शिव 'महाकाल' कहलाते हैं।

शिव यम युद्धयमपाशमार्कंडेय
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मार्कंडेय ऋषि को शिव ने मृत्यु से कैसे बचाया

मार्कंडेय ऋषि की 16 वर्ष आयु थी। शिवलिंग से लिपटकर महामृत्युंजय मंत्र का जप करते हुए यम को चुनौती दी। शिव प्रकट हुए, यम को भगाया और मार्कंडेय को अमरता का वरदान दिया। इसीलिए शिव 'कालांतक' कहलाते हैं।

मार्कंडेय16 वर्षमहामृत्युंजय मंत्र
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बाणासुर शिव का भक्त था — उसकी कथा क्या है

बाणासुर महाबलि-पुत्र, हजार भुजाओं वाला शिव-भक्त था। उसकी पुत्री उषा ने अनिरुद्ध से गंधर्व-विवाह किया। शिव ने बाणासुर की रक्षा के लिए कृष्ण से युद्ध किया — अंत में शिव की आज्ञा पर बाणासुर ने अनिरुद्ध को मुक्त किया।

बाणासुरहजार भुजाएँउषा अनिरुद्ध
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रावण ने शिव के लिए कौन सा स्तोत्र रचा था

रावण ने कैलाश दबने पर दर्द की अवस्था में ही 'शिव तांडव स्तोत्र' की रचना की। इसमें 16 श्लोक हैं जो शिव के तांडव, जटा, डमरू और सर्वशक्तिमान स्वरूप का काव्यात्मक वर्णन करते हैं।

शिव तांडव स्तोत्ररावण रचित16 श्लोक
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रावण ने शिव को कैसे प्रसन्न किया था

रावण ने कैलाश उठाने का प्रयास किया, शिव के पैर से दबने पर दर्द में शिव तांडव स्तोत्र की रचना की। शिव प्रसन्न हो 'चंद्रहास' खड्ग और 'रावण' नाम दिया। नौ सिर बलि देकर दशानन बना और अजेयता का वरदान पाया।

रावण शिव भक्तकैलाश उठानारावण तपस्या
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शिव भक्त कथा — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर शिव भक्त कथा श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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शिव भक्त कथा को गहराई से समझने का तरीका

शिव भक्त कथा प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

14 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

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