विस्तृत उत्तर
जलंधर की उत्पत्ति की कथा शिव पुराण और देवी भागवत पुराण में वर्णित है।
उत्पत्ति — एक बार देवराज इंद्र शिव का दर्शन करने कैलाश गए। भगवान शिव ने उनकी परीक्षा के लिए अवधूत का वेश धारण किया। इंद्र ने उस अवधूत को पहचाना नहीं और अपमानजनक व्यवहार किया। इससे शिव क्रोधित हुए। शिव का क्रोध-तेज उनकी दृष्टि से निकलकर समुद्र में गिरा। उस तेज से एक अत्यंत तेजस्वी और शक्तिशाली बालक का जन्म हुआ। सिंधु (समुद्र) से उत्पन्न होने के कारण उसका नाम 'जलंधर' पड़ा।
शक्ति — जलंधर शिव के तेज से उत्पन्न था इसलिए वह देवताओं से भी अधिक शक्तिशाली था। शिव के ही तेज से जन्मा होने के कारण शिव के अलावा कोई और उसका वध नहीं कर सकता था।
वृंदा से विवाह — जलंधर का विवाह दैत्यराज कालनेमी की पुत्री वृंदा से हुआ। वृंदा अत्यंत पतिव्रता स्त्री थी और उसका सतीत्व ही जलंधर की अजेयता का कवच था। आज का पंजाब का जालंधर नगर उसी के नाम पर है।





