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शिव भक्त कथा⏱ 2 मिनट पठन

रावण ने शिव को कैसे प्रसन्न किया था?

रावण ने कैलाश उठाने का प्रयास किया, शिव के पैर से दबने पर दर्द में शिव तांडव स्तोत्र की रचना की।

संक्षिप्त उत्तर

रावण ने कैलाश उठाने का प्रयास किया, शिव के पैर से दबने पर दर्द में शिव तांडव स्तोत्र की रचना की। शिव प्रसन्न हो 'चंद्रहास' खड्ग और 'रावण' नाम दिया। नौ सिर बलि देकर दशानन बना और अजेयता का वरदान पाया।

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विस्तृत उत्तर

रावण भगवान शिव का परम भक्त था। शिव पुराण और वाल्मीकि रामायण दोनों में उसकी शिव-भक्ति का उल्लेख है।

कैलाश उठाने की कथा — एक बार रावण ने अपने बल के अहंकार में कैलाश पर्वत को ही उठाकर लंका ले जाने का निश्चय किया। उसने अपनी बीस भुजाओं से कैलाश को उठा लिया। इससे पार्वती भयभीत हुईं। तब भगवान शिव ने अपने पैर के अंगूठे से कैलाश को दबाया जिससे रावण की अंगुलियाँ कुचल गईं और वह दर्द से चिल्लाने लगा।

स्तुति रचना — रावण ने दर्द में छटपटाते हुए भी शिव की स्तुति में 'शिव तांडव स्तोत्र' की रचना की। इसे सुनकर भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने अपना पैर हटा लिया।

सिर-बलि — रावण ने एक बार नौ बार अपने सिर काटकर शिवलिंग पर अर्पित किए। दसवाँ काटने पर शिव प्रकट हुए और उसे अजेयता का वरदान और 'चंद्रहास' खड्ग दिया। उस चीत्कार (रवन) के कारण शिव ने उसे 'रावण' नाम दिया। इसीलिए वह 'दशानन' (दस सिरों वाला) कहलाया।

उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

रावण ने शिव को कैसे प्रसन्न किया था को संदर्भ सहित समझें

रावण ने शिव को कैसे प्रसन्न किया था का सबसे सीधा सार यह है: रावण ने कैलाश उठाने का प्रयास किया, शिव के पैर से दबने पर दर्द में शिव तांडव स्तोत्र की रचना की। शिव प्रसन्न हो 'चंद्रहास' खड्ग और 'रावण'...

शिव भक्त कथा जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.

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शिव भक्त कथा प्रश्नोत्तर
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