विस्तृत उत्तर
जब वृंदा को भगवान विष्णु के छल का पता चला तो वे अत्यंत क्रोधित हुईं और उन्होंने दो श्राप दिए।
पहला श्राप — 'जिस प्रकार तुमने छल से मुझे पति-वियोग दिया है, उसी प्रकार तुम्हारी पत्नी का भी छलपूर्वक हरण होगा और तुम्हें भी पत्नी-वियोग सहना पड़ेगा।' इस श्राप के फलस्वरूप भगवान विष्णु के राम-अवतार में सीता का रावण द्वारा हरण हुआ और उन्हें दीर्घ पत्नी-वियोग सहना पड़ा।
दूसरा श्राप — 'तुमने मेरा सतीत्व भंग किया है, अतः तुम पत्थर बन जाओगे।' इस श्राप के फलस्वरूप विष्णु के शालिग्राम रूप की उत्पत्ति हुई।
विष्णु का वरदान — भगवान विष्णु ने वृंदा से कहा — 'हे वृंदा, तुम अपने सतीत्व के कारण मुझे लक्ष्मी से भी अधिक प्रिय हो गई हो। अब तुम तुलसी के रूप में सदा मेरे साथ रहोगी। जो मनुष्य भी मेरे शालिग्राम रूप के साथ तुलसी का विवाह करेगा, उसे इस लोक और परलोक में महान यश और विपुल धन प्राप्त होगा।'
तुलसी उत्पत्ति — वृंदा के आत्मदाह के स्थान पर तुलसी का पौधा उग आया। इसीलिए तुलसी 'विष्णुप्रिया' है और शालिग्राम के साथ तुलसी-विवाह का विधान है।





