विस्तृत उत्तर
चंडेश्वर की कथा शिव पुराण में वर्णित है। यह कथा बाल-भक्ति की अनन्य महिमा को दर्शाती है।
कथा — चंड एक गरीब ग्वाला बालक था जो गाय चराता था। उसे शिव के प्रति बचपन से अगाध भक्ति थी। जब गाएँ चरती थीं, तब चंड एक स्थान पर शिवलिंग बनाकर उसका पूजन करने लगा। उसकी एक विशेष गाय प्रतिदिन स्वयं उस शिवलिंग पर अपना दूध अर्पित करती थी।
पिता का क्रोध — जब चंड के पिता को पता चला कि गाय का दूध घर नहीं आ रहा तो वे क्रोधित होकर आए और उस गाय को लात मारने लगे। यह देखकर बालक चंड अपने शिव का अपमान सहन नहीं कर सका और क्रोध में पिता पर प्रहार हो गया।
शिव की कृपा — भगवान शिव बालक की भक्ति और शिव के प्रति उसके क्रोध से अत्यंत प्रसन्न हुए। वे प्रकट हुए और उन्होंने चंड को 'चंडेश्वर' नाम देकर अपने गणों का अधिपति (गणाधिपति) बना दिया। शिव के प्रमुख गणों में चंडेश्वर का महत्वपूर्ण स्थान है और आज भी शिव मंदिरों में उनकी पूजा होती है।





