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शिव पूजा नियम📜 शिव पुराण, शोध: DNA India, Patrika, Jeevanjali2 मिनट पठन

शिव पूजा के बाद प्रसाद किसे नहीं देना चाहिए?

संक्षिप्त उत्तर

पत्थर/मिट्टी शिवलिंग का प्रसाद न खाएं, न बांटें — चंडेश्वर का भाग (शिव पुराण)। नदी में प्रवाहित करें। अपवाद: धातु/पारद शिवलिंग = प्रसाद ग्रहण योग्य। शिव प्रतिमा = ग्रहण योग्य।

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विस्तृत उत्तर

शिवलिंग पर चढ़े प्रसाद (निर्माल्य) के विशेष नियम हैं:

शिवलिंग का प्रसाद न खाएं, न बांटें (शोध — DNA/Patrika/Jeevanjali)

शिव पुराण: शिव के मुख से चंडेश्वर नामक गण प्रकट हुए — भूत-प्रेतों के प्रधान। शिवलिंग पर चढ़ा प्रसाद चंडेश्वर का भाग है। अतः पत्थर, मिट्टी, चीनी मिट्टी के शिवलिंग का प्रसाद न खाएं, न बांटें — नदी/जल में प्रवाहित करें।

अपवाद — धातु शिवलिंग

चांदी, तांबे, पीतल, पारद शिवलिंग पर चढ़ा प्रसाद चंडेश्वर का अंश नहीं — इसे ग्रहण कर सकते हैं और बांट सकते हैं।

शिव प्रतिमा (मूर्ति) का प्रसाद

शिव की साकार मूर्ति (शंकर प्रतिमा) पर चढ़ा प्रसाद ग्रहण और वितरण योग्य — यह नियम केवल शिवलिंग के लिए है।

अन्य नियम

  • शिवलिंग से उतारे फूल/बेलपत्र जमीन पर न फेंकें — नदी/पीपल के नीचे।
  • शिवलिंग का अभिषेक जल (चरणामृत) भी ग्रहण वर्जित (पत्थर/मिट्टी शिवलिंग का)।
  • शिव मंदिर में बना प्रसाद (जो शिवलिंग पर नहीं चढ़ा) बांट सकते हैं।
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शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण, शोध: DNA India, Patrika, Jeevanjali
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