विस्तृत उत्तर
शिवलिंग के स्पर्श को लेकर शास्त्रों में विस्तृत नियम बताए गए हैं। यह विषय कुछ मतभेदों वाला भी है:
शास्त्रीय नियम
1शिवलिंग के विभिन्न भाग
शिवलिंग में तीन मुख्य भाग हैं — सबसे नीचे ब्रह्म भाग (चौकोर आधार), मध्य में विष्णु भाग (अष्टकोणीय/गोलाकार पीठिका जिसमें जलधारी है), और सबसे ऊपर रुद्र (शिव) भाग (गोलाकार शीर्ष)। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार केवल पीठिका (योनि) भाग पर जल चढ़ाना चाहिए। शीर्ष लिंग भाग को सीधे स्पर्श न करना ही श्रेयस्कर माना गया है।
2पुरुषों के लिए
पुरुष श्रद्धालु स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करने के बाद शिवलिंग का स्पर्श और अभिषेक कर सकते हैं। संयमित जीवन जीने वाले, ब्रह्मचर्य व्रतधारी साधकों के लिए यह विशेष फलदायी माना गया है।
3विवाहित महिलाओं के लिए
कुछ शास्त्रीय परंपराओं में विवाहित महिलाएं शिवलिंग का स्पर्श कर सकती हैं, किन्तु यह सर्वमान्य नहीं है। अनेक परंपराओं में महिलाओं को शिवलिंग का ऊपरी (रुद्र) भाग न छूने का निर्देश दिया गया है। शिवलिंग पुरुष तत्त्व (ऊर्जा) का प्रतीक है — महिलाओं के लिए इसका सीधा स्पर्श अनुचित माना गया है।
4अविवाहित कन्याओं के लिए
अविवाहित कन्याओं को शिवलिंग स्पर्श करने से विशेष रूप से मना किया गया है। मान्यता है कि शिव सदा ध्यान और तपस्या में लीन रहते हैं, अतः उनकी तपस्या भंग हो सकती है।
5नंदी मुद्रा — विकल्प
जो महिलाएं श्रद्धावश शिवलिंग स्पर्श करना चाहें, उन्हें 'नंदी मुद्रा' में करना चाहिए। इस मुद्रा में हाथ की पहली और आखिरी उंगली सीधी रखें, बीच की दो उंगलियों को अंगूठे के साथ जोड़ें। इस मुद्रा में किया गया स्पर्श शास्त्रसम्मत माना गया है।
6सामान्य नियम (सभी के लिए)
- ▸स्पर्श से पूर्व स्नान कर शुद्ध वस्त्र पहनें।
- ▸दाहिने हाथ से जल अर्पित करें।
- ▸मासिक धर्म के दौरान स्पर्श पूर्णतः वर्जित।
- ▸भोजन करने के तुरंत बाद या अपवित्र अवस्था में स्पर्श न करें।
भिन्न मत
कुछ आधुनिक विद्वानों और भक्ति परंपराओं का मत है कि शिव सबके हैं और सच्ची श्रद्धा से की गई पूजा में लिंग भेद नहीं होता। यह विषय परंपरा और सम्प्रदाय के अनुसार भिन्न-भिन्न है।





