विस्तृत उत्तर
शिवलिंग के टूटने या खंडित होने पर शास्त्रों में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं:
मूल नियम
शिव पुराण और लिंग पुराण के अनुसार खंडित (टूटा हुआ) शिवलिंग की पूजा नहीं करनी चाहिए। खंडित मूर्ति या शिवलिंग अपूर्णता का प्रतीक है और इसकी पूजा से शुभ फल प्राप्त नहीं होता।
क्या करें
1नदी में विसर्जन
टूटे शिवलिंग को किसी पवित्र नदी (गंगा, नर्मदा आदि) या बहते जल में श्रद्धापूर्वक विसर्जित करें। विसर्जन से पूर्व शिवलिंग को जल और पंचामृत से स्नान कराएं, 'ॐ नमः शिवाय' का जप करें और फिर नदी में प्रवाहित करें।
2पीपल या बिल्व वृक्ष के नीचे
यदि नदी उपलब्ध न हो, तो टूटे शिवलिंग को पीपल या बिल्व (बेल) के वृक्ष की जड़ में श्रद्धापूर्वक रख दें।
3नया शिवलिंग स्थापित करें
विसर्जन के बाद नया शिवलिंग विधिवत स्थापित करें। नर्मदेश्वर शिवलिंग इसका सर्वोत्तम विकल्प है।
4कभी कूड़े में न फेंकें
टूटा शिवलिंग चाहे कितना भी क्षतिग्रस्त हो, इसे कभी कूड़ेदान या अपवित्र स्थान पर न रखें।
अपवाद — स्वयंभू शिवलिंग
स्वयंभू या अत्यंत प्राचीन शिवलिंग यदि समय के साथ क्षतिग्रस्त हो, तो कुछ परंपराओं में इनकी पूजा जारी रखी जाती है क्योंकि इनमें शिव की दैवीय उपस्थिति मानी जाती है। ऐसी स्थिति में स्थानीय आचार्य/पुरोहित से परामर्श लें।
मान्यता
शिवलिंग का अचानक टूटना कभी-कभी अशुभ संकेत माना जाता है — ऐसी स्थिति में शिव पूजा, रुद्राभिषेक और दान करना शुभ रहता है।





