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शिव भक्त कथा⏱ 2 मिनट पठन

मार्कंडेय ऋषि को शिव ने मृत्यु से कैसे बचाया?

मार्कंडेय ऋषि की 16 वर्ष आयु थी। शिवलिंग से लिपटकर महामृत्युंजय मंत्र का जप करते हुए यम को चुनौती दी।

संक्षिप्त उत्तर

मार्कंडेय ऋषि की 16 वर्ष आयु थी। शिवलिंग से लिपटकर महामृत्युंजय मंत्र का जप करते हुए यम को चुनौती दी। शिव प्रकट हुए, यम को भगाया और मार्कंडेय को अमरता का वरदान दिया। इसीलिए शिव 'कालांतक' कहलाते हैं।

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विस्तृत उत्तर

मार्कंडेय ऋषि की कथा शिव की अनन्य भक्ति और महामृत्युंजय मंत्र की उत्पत्ति से जुड़ी है।

कथा — ऋषि मृकण्डु और उनकी पत्नी ने संतान के लिए घोर तपस्या की। शिव ने दो विकल्प दिए — अल्पायु बुद्धिमान पुत्र या दीर्घायु मंदबुद्धि पुत्र। मृकण्डु ने अल्पायु बुद्धिमान पुत्र चुना। इस प्रकार मार्कंडेय का जन्म हुआ जिनकी आयु केवल 16 वर्ष थी।

मार्कंडेय की भक्ति — जब 16 वर्ष की आयु निकट आई, मार्कंडेय ने माता-पिता से सारी बात जानी और कहा — 'मेरे पास शिव-भक्ति है, मृत्यु मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकती।' वे एक शिवलिंग के समक्ष बैठकर घोर तपस्या और महामृत्युंजय मंत्र का जप करने लगे।

शिव का हस्तक्षेप — जब यमराज के दूत मार्कंडेय के प्राण हरने में असफल रहे तो यमराज स्वयं आए। मार्कंडेय ने शिवलिंग से लिपटकर शिव का आह्वान किया। यमपाश ने शिवलिंग को भी लपेट लिया। भगवान शिव क्रोध में प्रकट हुए, यम को भगाया और मार्कंडेय को अमरता और यश का वरदान दिया। तभी से शिव 'कालांतक' — काल के काल — कहलाते हैं।

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